छतरपुर/ हर्षित पांडेय/ खबर डिजिटल बागेश्वर धाम पर इस वर्ष दीपावली का पावन पर्व भक्तिमय माहौल के साथ श्रद्धा और उत्साह से मनाया गया। महाराज श्री ने बागेश्वर धाम में सेवा कर रहे सेवादारों और कार्य कर रहे कर्मचारियों को मिठाई, चांदी के सिक्के और दक्षिणा भी दी। बागेश्वर महाराज ने सबसे पहले गौशाला में गौ, अश्व और वाहन पूजन कर शुभारंभ किया। इसके उपरांत उन्होंने बागेश्वर बालाजी के चरणों में दीप प्रज्ज्वलित किए और खूब पटाखे फोड़े और आतिशबाजी कर दीपोत्सव की शुभकामनाएं दीं।
भक्तों ने रंगोली बनाकर दीप सजाए
इस अवसर पर धाम पर देशभर से पहुँचे भक्तों ने भी इस पावन अवसर पर दीप जलाकर अपनी भक्ति अर्पित की। किसी ने राम नाम लिखकर, तो किसी ने ‘श्री राम जय राम’, ‘ॐ’, पादुका और अन्य धार्मिक प्रतीकों के आकार में रंगोली बनाकर दीप सजाए। भक्तों द्वारा घी और तेल के दीपों से बागेश्वर धाम परिसर के विभिन्न स्थलों को सजाया गया।
पूरे परिसर में लगभग 1 लाख 25 हज़ार (सवा लाख) दीपक जलाए गए, जिनकी रोशनी से बागेश्वर धाम स्वर्णिम आभा से आलोकित हो उठा। और महाराज श्री नर खूब फटाखे फोड़े और फुलझड़ी और अनारदाने जलकर के धूम धाम से दीपोत्सव का पर्व मनाया और दीपों की अनंत श्रृंखला ने ऐसा दृश्य प्रस्तुत किया, भक्तों ने दीपोत्सव के इस दिव्य आयोजन में भाग लेकर सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।
दीपक ज्ञान के प्रकाश का प्रतीक
बागेश्वर महराज ने कहा दीप प्रज्वलन का तात्पर्य केवल लक्ष्मी के आगमन से नहीं है, बल्कि दीपक ज्ञान के प्रकाश का प्रतीक है। जिस प्रकार दीपक के जलने से प्रकाश फैलता है, उसी प्रकार मन में ज्ञान का प्रकाश होने से ज्ञान का प्रकाश होता है और अज्ञान का अंधकार दूर होता है।और फाटकों पर बोले कि पटाखे क्यों जलाए जाते हैं ,कई लोगों ने यह ज्ञान दिया कि पिछली दीपावली पर पटाखे नहीं जलाने चाहिए थे, परन्तु हम में से कुछ लोग ऐसे हैं जिन्होंने इस बात का पालन नहीं किया। हम पटाखों से दूरी बनाए रखते हैं, क्योंकि वे फटते हैं। हमें उन फाटकों से दूरी बनाए रखनी चाहिए जो जल्दी फट जाते हैं। उदाहरण के लिए उन लोगों से भी दूरी बनाए रखनी चाहिए जो जल्दी बात करते हैं और अपनी बात को पेट में नहीं रख पाते,बता देते है.
पटाखे जलाने से प्रदूषण होता
वैसे तो हम पटाखों से दूरी बनाए रखते हैं। पटाखे जलाने से प्रदूषण होता है। रूस और यूक्रेन के बीच कई वर्षों से युद्ध चल रहा है, जिसमें बम और गोले फट रहे हैं। क्या क्रिकेट जीतने, नव वर्ष और शादियों में करोड़ों के पटाखे फोड़ने से प्रदूषण होता हैं ,पटाखे नहीं जलाने चाहिए, परन्तु यदि कोई रोकने वाला हो तो उन्हें जलाना चाहिए।
बागेश्वर धाम पर सूरत से आए कालू भाई ने कहा कि बागेश्वर धाम हमारे बाप का घर है और हम प्रत्येक त्यौहार यहां मनाने आते हैं। पिछले तीन वर्षों से हम दीपावली का त्यौहार मनाने के लिए आते हैं।
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विनय सिंह ने बताया अनुभव
हरिद्वार उत्तराखंड से आय हुए विनय सिंह ने बताया कि बागेश्वर धाम पर दिवाली मनाई, बहुत अच्छा लगा। आना नहीं चाहता था, लेकिन पिछले 5 दिनों से शरीर में पीड़ा थी, लेकिन बागेश्वर धाम पर जाकर वो समाप्त हो गई। सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हुआ और आज तक की सभी दीपावली हमने परिवार के साथ मनाई, लेकिन बागेश्वर बालाजी के साथ यह पहली दीपावली मनाई। बहुत अच्छा लगा कि महाराज के साथ बजरंग बली के द्वार पर दिवाली मनाई।
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