जबलपुर/खबर डिजिटल/ प्राचीन हिंदू ग्रंथ मनुस्मृति को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। जिन्होंने नई बहस को जन्म दे दिया। पूर्व विधायक किशोर समरीते ने इस धार्मिक ग्रंथ पर प्रतिबंध लगाने की मांग की और समानता को आगे बढ़ाने वाला करार दिया। हालांकि अब इस मामले में दो सप्ताह के बाद सुनवाई होगी।
क्या है पूरा मामला?
प्राचीन हिंदू ग्रंथ मनुस्मृति को लेकर लांजी के पूर्व विधायक किशोर समरीते ने इस ग्रंथ पर प्रतिबंध लगाने की मांग की, उन्होंने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है। उन्होंने तर्क दिया कि मनुस्मृति की विषयवस्तु जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता को प्रोत्साहित करती है, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15 की भावना के विपरीत है। जिसके चलते इस धार्मिक ग्रंथ पर प्रतिबंध लगाने की जरुरत है, ताकि समाज में समानता का भाव जाग्रत करने में मदद मिले।
दो सप्ताह बाद होगी सुनवाई
शुक्रवार को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की बेंच में सुनवाई होना तय था, लेकिन, याचिकाकर्ता के वकील ही सुनवाई में शामिल नहीं हो सके। अगली सुनवाई दो हफ्ते के लिए बढ़ा दी गई। याचिका के जरिए मनुस्मृति में समाज के विभिन्न वर्गों को बांटने का आरोप लगाया गया है। वहीं समाज में घृणा और वैमनस्यता फैलने का खतरा भी होने की जानकारी शामिल है।


