खंडवा/हरेंद्र नाथ ठाकुर/खबर डिजिटल/ देवउठनी एकादशी के पावन अवसर पर शनिवार को खंडवा के प्रसिद्ध महादेवगढ़ मंदिर में एक अनोखा धार्मिक संस्कार देखने को मिला। अमलपुरा निवासी मोहम्मद खान ने इस दिन से अपनी नई आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत की। मंदिर परिसर में आयोजित इस विशेष अनुष्ठान के दौरान मोहम्मद ने सनातन धर्म की परंपराओं को आत्मसात करते हुए ‘आई लव महादेव’ के उद्घोष के बीच भोलेनाथ का पूजन, अभिषेक और आरती की।
पंडित प्रमोद खेड़े ने कराया शुद्धिकरण संस्कार
महादेवगढ़ मंदिर में दोपहर से ही भक्तों और श्रद्धालुओं का जमावड़ा लग गया था। पंडित प्रमोद खेड़े के सानिध्य में शुद्धिकरण और संस्कार का कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस अवसर पर दस विधि स्नान कराया गया, जिसमें गाय का गोबर, गोमूत्र, गंगाजल, गाय का दूध, दही, पंचामृत, तुलसी, मिट्टी और हल्दी के उबटन से स्नान कराया गया। संस्कार के दौरान मुंडन और शुद्धिकरण की विधि पूरी की गई। इसके बाद मंदिर प्रांगण में महादेव का अभिषेक पूजन और आरती सम्पन्न हुई। आरती के पश्चात मंदिर परिसर ‘जय महाकाल, आई लव महादेव, सनातन धर्म की जय’ के उद्घोषों से गूंज उठा। उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस क्षण को धर्म और एकता का प्रतीक बताया।
मोहम्मद से शुरू हुआ सफर महादेव पर समाप्त
इस विशेष कार्यक्रम में एक और अनोखा प्रसंग देखने को मिला। पूर्व में इमाम के बेटे मुस्तफा, जिन्होंने स्वयं को ‘मारुति नंदन’ के रूप में पहचान बनाई, उसने मोहम्मद का गंगाजल से स्नान करवाया और उन्हें ‘महादेव’ की नई यात्रा के लिए आशीर्वाद दिया। इस अवसर को ‘मोहम्मद से महादेव की यात्रा’ का नाम दिया गया।
भक्तों और समाजसेवियों की रही मौजूदगी
इस आयोजन में महादेवगढ़ संरक्षक अशोक पालीवाल के साथ कई स्थानीय धर्मप्रेमी और सामाजिक कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। सभी ने इस संस्कार में सहभागिता निभाई और ‘आई लव महादेव’ के उद्घोष लगाए। कार्यक्रम के दौरान भक्तों ने ‘महाकाल की जय’ और ‘आई लव महादेव’ के उद्घोषों से वातावरण को शिवमय बना दिया। लोगों ने इसे आस्था, आत्मबोध और नई शुरुआत का पर्व बताया।
अबतक 30 से अधिक बहनों ने भी अपनाया सनातन धर्म
मंदिर समिति से जुड़े अशोक पालीवाल ने बताया कि इस वर्ष महादेवगढ़ मंदिर में अब तक 14 युवाओं की घर वापसी कराई जा चुकी है। इसके अलावा 30 से अधिक बहनों ने भी हिंदू युवाओं से विवाह कर सनातन धर्म स्वीकार किया है। पालीवाल ने कहा, ‘यह सिर्फ धर्म परिवर्तन नहीं, बल्कि अपनी जड़ों की ओर लौटने की प्रक्रिया है। यहां किसी पर कोई दबाव नहीं, सब अपनी श्रद्धा और विश्वास से आते हैं।’
महादेवगढ़ बना आस्था और एकता का प्रतीक
मंदिर के संरक्षक अशोक पालीवाल ने बताया की ‘जब कोई व्यक्ति सच्चे भाव से भगवान की शरण में आता है, तो ईश्वर स्वयं उसे मार्ग दिखाते हैं। आज मोहम्मद से महादेव की यात्रा इसी सच्चाई का प्रमाण है।’ महादेवगढ़ मंदिर में इस अवसर पर भक्ति गीत, शिव स्तुति और आरती का आयोजन भी हुआ। बड़ी संख्या में भक्तों ने भाग लिया और कार्यक्रम के अंत में प्रसाद वितरण किया गया।


