इंदौर/नरेंद्र महावर/खबर डिजिटल/ मंदिर में भंडारे तो आपने कई सुने होंगे, लेकिन क्या कभी आपने सुना है कि किसी श्मशान घाट में भी भंडारा होता है, जीहां तो फिर आज जान लीजिये इंदौर के प्राचीन रामबाग श्मशान घाट में हर साल भैरव अष्टमी के मौके पर विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है। अचंभे की बात यह भी है कि जब रात में लोग श्मशान में जाने से डरते हैं, वहीं पर सूर्यास्त के बाद भंडारे का आयोजन होता है और हजारों की संख्या में बाबा भैरवनाथ के भक्त भंडारे में जुटते हैं।
सूर्यास्त के बाद होते हैं 3 दिवसीय आयोजन
हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, सूर्यास्त के बाद मुक्तिधाम में प्रवेश को वर्जित माना गया है। लेकिन इंदौर शहर में एक ऐसा मुक्तिधाम है, जहां साल में एक बार तीन दिन तक महोत्सव का आयोजन किया जाता है। इसके लिए हजारों श्रद्धालु सूर्यास्त के बाद जुटते हैं और मुक्तिधाम में विराजित अपने आराध्य का जन्मोत्सव बड़े धूमधाम से मनाते हैं और तो और श्रद्धालु अपने शिव स्वरुप बाबा भैरवनाथ को 56 भोग भी अर्पित करते हैं. वहीं, जलती चिताओं के बीच भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है।
भंडारे में जुटता है इंदौर शहर
इंदौरवासियों के लिए भैरव अष्टमी पर भंडारे का प्रसाद लेने का एक ही ठिकाना सभी को याद रहता है, वो है रामबाग का श्मशान घाट, जहां पर आयोजन के दौरान पूरे श्मशान घाट को दुल्हन की तरह सजाया जाता है। बिना किसी हिचकिचाहट के जलती चिताओं के बीच लोग चाव से बाबा भैरवनाथ का प्रसाद ग्रहण करते हैं।
बाकायदा टेबल कुर्सी पर बैठाकर लेते हैं प्रसाद
भैरव अष्टमी पर रामबाग के श्मशान में होने वाले भंडारे में टेबल कुर्सी का इंतजाम किया जाता है, किसी भी व्यक्ति को नीचे बैठाकर प्रसाद नहीं खिलाया जाता है, जोकि अपने-आप में खास है, क्योंकि आमतौर पर भंडारे में धरती पर बैठकर ही प्रसाद ग्रहण करने की परंपरा चली आ रही है।


