डिंडौरी/शैलेश नामदेव/खबर डिजिटल/ शहपुरा विधानसभा के अंतिम छोर पर स्थित वनग्राम ढोलबीजा में इस समय चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR–Special Intensive Revision) ने प्रशासनिक तंत्र में एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने जिले भर में चर्चा पैदा कर दी है। यहां के मतदान केन्द्र क्रमांक 336 में नियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं बीएलओ लता चिचाम का कार्य और उनका अद्भुत समर्पण कठिन परिस्थितियों के बावजूद लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूती देने का उत्कृष्ट उदाहरण बन चुका है।
दुर्गम क्षेत्र, न के बराबर नेटवर्क
ढोलबीजा जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर एक वनांचल क्षेत्र में स्थित है। जहां तक पहुंचना ही अपने आप में चुनौतीपूर्ण है, ऊबड़-खाबड़ रास्ते, घना जंगल और संपर्क साधनों की भारी कमी। परिस्थिति का सबसे बड़ा संकट है मोबाइल नेटवर्क का लगभग पूरी तरह अभाव। मतदान सूची में सुधार, संशोधन या नई प्रविष्टियां जोड़ने का कार्य इन दिनों ऑनलाइन अपलोड के माध्यम से होता है। लेकिन ढोलबीजा जैसे क्षेत्र में इंटरनेट उपलब्ध ही न हो, तो यह कार्य बेहद कठिन हो जाता है।
लकड़ी की बल्ली का सहारा लेकर दीवार पर चढ़कर अपलोड
इन गंभीर बाधाओं के बीच भी लता चिचाम ने हार नहीं मानी। घर-घर जाकर गणना फार्म भरने के बाद उन्हें ऑनलाइन अपलोड करने के लिए उन्हें एकमात्र स्थान ढूंढा गया, एक भवन की दीवार का ऊंचा हिस्सा, जहां मुश्किल से कुछ क्षण के लिए 1–2 सिग्नल मिल पाते हैं। इन सिग्नलों को पकड़ने के लिए वे लकड़ी की बल्ली लगाकर दीवार पर चढ़ जाती हैं, हाथ में मोबाइल लेकर नेटवर्क के आने का इंतजार करती हैं और फिर तेजी से पूरा डेटा अपलोड कर देती हैं। ऐसी स्थिति में कार्य करना किसी भी सामान्य कर्मचारी के लिए लगभग असंभव है, परंतु लता चिचाम इस कठिनाई को अपनी जिम्मेदारी के बीच बाधा नहीं बनने देतीं।
राजस्व निरीक्षक के साथ सतत भ्रमण
लता चिचाम, अमरपुर वृत्त के राजस्व निरीक्षक के साथ प्रतिदिन क्षेत्र में भ्रमण कर रही हैं। वे घर-घर जाकर मतदाता सूची का सत्यापन कर रही हैं, जिनमें उम्र की पुष्टि, मृत मतदाताओं का विलोपन,नए मतदाताओं का पंजीयन, आधार लिंकिंग, स्थानांतरण से जुड़े रिकॉर्ड शामिल है। इन सभी कार्यों को वे बारीकी से पूरा करती हैं और तत्काल अपलोड के लिए हर संभव प्रयास करती हैं।
41.61% कार्य किया पूरा
18 नवंबर 2025, रात 8 बजे तक जारी SIR प्रगति रिपोर्ट में जानकारी मिली कि उनके मतदान केन्द्र में 41.61% कार्य पूरा हो चुका है। यह उपलब्धि इसलिए विशेष मानी जा रही है क्योंकि जिले के कई मतदान केन्द्र, जिनके पास बेहतर नेटवर्क और संसाधन उपलब्ध हैं, वे भी इससे कम प्रगति पर हैं। यह लता चिचाम की दृढ़ इच्छाशक्ति और कार्य के प्रति समर्पण का प्रमाण है।
अन्य कर्मचारियों के लिए मिसाल
आमतौर पर बीएलओ संसाधनों की कमी, नेटवर्क समस्या या भौगोलिक कठिनाइयों के कारण कार्य में देरी का हवाला देते हैं। लेकिन ढोलबीजा की बीएलओ लता चिचाम ने इन सभी सीमाओं को नज़रअंदाज़ कर दिखाया कि ‘जो काम करना चाहता है, उसके लिए कोई भी परिस्थिति बाधा नहीं बन सकती।’ उनकी कार्यशैली न केवल सराहनीय है, बल्कि चुनावी कार्यों में लगे अन्य कर्मचारियों के लिए प्रेरणा भी है।
लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति समर्पण का अद्भुत उदाहरण
ढोलबीजा जैसी दुर्गम पहाड़ी बस्ती में, जहां मोबाइल नेटवर्क पकड़ने के लिए भी विशेष प्रयास करने पड़ते हैं, वहां लता चिचाम का यह जज्बा और निष्ठा यह साबित करती है कि लोकतंत्र की मजबूती में जमीनी कर्मचारी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। प्रतिदिन जोखिम उठाते हुए दीवार पर चढ़कर डेटा अपलोड करना, कठिन परिस्थितियों में भी घर-घर जाकर सत्यापन करना और समय सीमा के भीतर उत्कृष्ट प्रगति प्रस्तुत करना—ये सभी पहलू उनके कर्तव्य के प्रति असाधारण निष्ठा का परिचायक हैं।
ढोलबीजा के लिए गर्व का क्षण
लता चिचाम की प्रतिबद्धता ने न केवल प्रशासन को नई ऊर्जा दी है, बल्कि ढोलबीजा क्षेत्र के लिए भी गौरव का विषय बन गई है। ग्रामीणों का कहना है कि वे हमेशा से मेहनती और ईमानदार कार्यशैली के लिए जानी जाती हैं, और अब SIR कार्य में उनका योगदान पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।


