रीवा/अरविन्द तिवारी/खबर डिजिटल/ रीवा जिला मुख्यालय से 100 किमी दूरी पर स्थित सिविल अस्पताल त्योंथर की स्थिति इन दिनों बदहाल होती जा रही है। स्वास्थ्य सुविधाओं पर लगा ग्रहण कम होने का नाम नहीं ले रहा है। स्थानीय लोगों और मरीजों का आरोप है कि अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्था और गिरती सेवाओं के पीछे ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) की लगातार लापरवाही और मुख्यालय पर न रहना प्रमुख कारण है। परिणामस्वरूप, अस्पताल मरीजों के लिए इलाज का केंद्र कम और परेशानी का केंद्र अधिक बन चुका है।अस्पताल पूरी तरह बीमार हो गए है, अस्पताल में सुबह से ही सैकड़ों मरीज पहुंचते हैं, लेकिन उनके स्वागत में अव्यवस्थित ओपीडी, गाइडेंस के लिए किसी कर्मी की अनुपस्थिति और डॉक्टरों की टीम की स्वयं की क्लिनिक पर ध्यान देना और शासकीय अस्पताल में ध्यान न देना जैसी समस्याएं खड़ी मिलती हैं। कई बार मरीजों को पर्ची बनवाने से लेकर डॉक्टर को दिखाने तक दो से तीन घंटे तक की मशक्कत करनी पड़ती है, तो कभी कभार डॉक्टर ही नहीं मिलते। ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों के लिए यह स्थिति और भी कष्टदायक है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि जब से ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर का डॉक्टर सुग्रीव दास कोल ने जिम्मा लिया है, तब से स्वास्थ्य व्यवस्था पर पूरी तरह ग्रहण लग गया है।
ग्रामीणों ने बेहतर व्यवस्था के लिए लगाई गुहार
अस्पताल की अव्यवस्था पर वरिष्ठ समाज सेवी राहुल शुक्ला ने स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला, त्यौंथर विधायक सिद्धार्थ तिवारी और पूर्व विधायक श्यामलाल द्विवेदी सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाते हुए अपील की और कहा कि इन पांच छह माह से सिविल अस्पताल त्योंथर ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर के लापरवाही के चलते पूरी तरह से स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल हो गई, और सिविल अस्पताल में ग्रहण लग चुका है, जबकि केंद्र और राज्य सरकार के द्वारा मरीजो बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए समस्त उपकरण उपलब्ध है, पर बीएमओ साहब की अनदेखी के चलते ना तो मरीजों को स्ट्रेचर मिलता है, ना ही दवाइयां। कई मेडिकलों से सेटिंग होने के का चलते डॉक्टर की टीम के द्वारा अस्पताल की दवाई ना लिखकर बाहर की महंगी महंगी दवाइयां लिख दी जाती है। जिसके कारण मरीज भटकते रहते हैं इसलिए माननीय स्वास्थ्य मंत्री डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला, त्यौंथर विधायक सिद्धार्थ तिवारी,पूर्व विधायक श्यामलाल द्विवेदी से समय-समय पर अस्पताल का निरीक्षण करने की अपील की ताकि मरीजों को कोई भी समस्या का सामना न करना पड़े।
सिविल अस्पताल त्योंथर में इलाज कम रेफर ज्यादा
स्थानीय लोगों और मरीजों की माने तो सिविल अस्पताल त्योंथर मैं जब भी कोई भी मरीज किसी मर्ज का पहुंचता है तो अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद सीधे रेफर का खेल चलता है, कारण है कि डॉक्टर सिविल अस्पताल में सेवा देने की बजाय खुद के क्लीनिक पर ज्यादा फोकस करते हैं। वही रेफर के समय मरीज को चाकघाट बॉर्डर उस पर यूपी के अस्पतालों में इलाज करने की सलाह दी जाती है, साथ ही कहा जाता है कि वहां आपका इलाज सस्ते दाम में और बेहतर व्यवस्था पर हो जाएगा। सूत्रों की माने तो इस काम को बखूबी से निभाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं को भी लगाया गया है, ज्यादातर आशा कार्यकर्ता डिलीवरी सहित महिलाओं के चेकअप के लिए चाकघाट बॉर्डर स्थित यूपी के अस्पताल में चक्कर लगाते दिखती है, पर देखना होगा कि कब तक ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर सुग्रीव दास कोल की मनमानी चलेगी और कुंभकर्णी नींद से जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि जागेंगे और मरीजों को बेहतर इलाज की व्यवस्था मिलेगी।


