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Friday, April 17, 2026
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Dindori News : डिंडौरी की नई पीढ़ी का संकल्प… बाल विवाह से आजादी की गूंज

शालाओं में उठी बदलते भविष्य की आवाज

डिंडौरी/शैलेश नामदेव/खबर डिजिटल/ डिंडौरी जिले में 100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत अभियान को नई गति देते हुए शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता की एक मजबूत लहर दिखाई दी। कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया के मार्गदर्शन में संचालित इस अभियान के तहत विद्यार्थियों में बाल विवाह के दुष्परिणामों और कानूनी प्रावधानों को लेकर व्यापक समझ विकसित की जा रही है। इसी कड़ी में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रैपुरा, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भोंदू टोला (पुरानी डिंडौरी) तथा शासकीय उत्कृष्ट महाविद्यालय मेहंदवानी में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां विद्यार्थियों ने बाल विवाह के खिलाफ एक स्वर में अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

बाल विवाह के दुष्परिणाम
सत्रों में विशेषज्ञों व अधिकारियों ने बताया कि बाल विवाह से शारीरिक कमजोरी, शिक्षा में बाधा, मानसिक व सामाजिक विकास में रुकावट, हिंसा व शोषण का बढ़ता खतरा, समयपूर्व गर्भावस्था, तथा मातृ मृत्यु दर में वृद्धि जैसी गंभीर समस्याएं जन्म लेती हैं। विद्यार्थियों को बताया गया कि बाल विवाह न सिर्फ सामाजिक बुराई है, बल्कि कानूनी रूप से दंडनीय अपराध भी है। इसे करना, करवाना अथवा सहयोग देना, सभी पर 2 वर्ष तक का कठोर कारावास, 1 लाख रुपये तक का जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है।

सामूहिक शपथ और हस्ताक्षर अभियान
कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायक क्षण वह रहा, जब विद्यार्थियों, शिक्षकों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और पर्यवेक्षकों ने एक साथ खड़े होकर जोरदार स्वर में शपथ ली, “बाल विवाह नहीं करेंगे, न होने देंगे।” हस्ताक्षर अभियान में विद्यार्थियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। बड़ी संख्या में युवा आवाजों ने अपने हस्ताक्षर के माध्यम से बाल विवाह उन्मूलन के प्रति अटूट प्रतिबद्धता दर्ज की।

अधिकारियों की सक्रिय मौजूदगी
जागरूकता कार्यक्रमों में विद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षकगण, सेक्टर पर्यवेक्षक सोनल उइके, यशोदा भलावी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आईसीपीएस टीम, काउंसलर सुषमा डोंगरे, आउटरीच वर्कर पूजा तेकाम, तथा महिला एवं बाल विकास विभाग का पूरा स्थानीय स्टाफ उपस्थित रहा और बच्चों को मार्गदर्शन दिया। डिंडौरी में शिक्षा संस्थानों से उठी यह संगठित आवाज एक स्पष्ट संदेश देती है कि जिले का भविष्य बाल विवाह जैसी कुरीति को अब बर्दाश्त करने के लिए तैयार नहीं है। नई पीढ़ी अपने अधिकारों, शिक्षा और सुरक्षित भविष्य के लिए सजग होकर आगे बढ़ रही है, और यही बदलाव समाज में स्थायी परिवर्तन की राह बनाता है।

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