रीवा/अरविन्द तिवारी/खबर डिजिटल/ फरियादी महेंद्र पाल द्वारा 8 दिसंबर को थाना प्रभारी सोहागी को लिखित आवेदन पत्र देकर जीवित व्यक्ति को मृत घोषित करने वाले सरपंच कलावती दीपांकर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। जिसे थाना प्रभारी ने बीट प्रभारी प्रधान आरक्षक अनन्त राम तिवारी को देकर जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए थे, किंतु आवेदन पत्र देने के एक हफ्ते बाद फरियादी ने एफआईआर की नकल के लिए जांचकर्ता प्रधान आरक्षक से संपर्क किया, तो उन्होंने यह कहते हुए नकल देने से इंकार कर दिया कि उन्हें फरियादी का कोई भी आवेदन पत्र नहीं दिया गया।
मामले को दबाने का प्रयास – फरियादी
फरियादी को आवेदन की कॉपी नहीं देने को लेकर आरोप लग रहे हैं कि यह प्रतीत होता है कि थाना सोहागी में फरियादी की लिखित शिकायत को ऑनलाइन दर्ज न कर मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है, अतः फरियादी ने एसडीएम त्योंथर के यहां लिखित आवेदन पत्र देकर जीवित व्यक्तियों को मृत घोषित कर गलत तरीके से सचरा खानदान जारी करने वाले ग्राम पंचायत मझिगवां सरपंच के विरुद्ध अपराधिक प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई करने हेतु थाना प्रभारी सोहागी को निर्देशित करने की मांग की है।
आइये जानते हैं क्या है पूरा मामला
रीवा जिले की त्योथर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत मझिगवां में दो जिंदा व्यक्तियों को मृत घोषित करने का मामला सामने आया है। जहां पर ग्राम पंचायत मझिगवां की महिला सरपंच कलावती दीपांकर द्वारा स्व.रामसहाय की पुत्री स्व. श्यामकली पत्नी रामजग पाल के पुत्र अर्जुन पाल व शेर बहादुर के कहने पर 24 मई 25 को अपने लेटर पैड में स्व.रामसहाय पाल की पत्नी स्व. फुलझारा देवी का कूटरचित ढंग नाम बदलकर दुइजी देवी पाल एवं दोनों पुत्रों अमरनाथ व महेंद्र पाल निवासी मछेहिया टोला को सचरा खानदान में मृत घोषित कर दिया। इस संबंध में पीड़ित महेंद्र पाल ने बताया कि वह बीस वर्ष पूर्व पिता व माता की मृत्यु के बाद अपने भाई अमरनाथ के साथ काम धंधे की तलाश में राजस्थान जाकर वहीं पर मेहनत मजदूरी करने लगे।इसी अवसर का लाभ उठाते हुए उनके भांजे शेरबहादुर व अर्जुन पाल व द्वारा नियम विरुद्ध ढ़ग से सचरा खानदान में अपना नाम दर्ज कराकर हमारी जमीन को गांव के ही गोविंद पाल के हाथों बिक्री कर दिया। इस संबंध की जानकारी होने पर जब हमने सरपंच से मिलकर अपने जीवित होने की बात बताई तो सरपंच द्वारा आनन फानन में 30 अक्टूबर 25 को अपने लेटर पैड में ही हमारे दोनों भांजों का नाम हटाये बिना हम दोनों भाईयों को जीवित दिखाकर व माता का सही नाम फूलझारा देवी पाल अंकित कर दूसरा सचरा खानदान बनाकर हमें दे दिया।


