आलीराजपुर/कुलदीप खराड़िया/खबर डिजिटल/ जिले में ग्रामीण अंचलों में अवैध रूप से चिकित्सा व्यवसाय करने वालों के कारण संभावित गंभीर घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्रीमती नीतू माथुर ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत जिले की सम्पूर्ण राजस्व सीमा में प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है।
पंजीकृत डिग्री की जरुरत
जारी आदेश के अनुसार, जिन व्यक्तियों के पास एलोपैथिक, आयुर्वेदिक, यूनानी अथवा होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति की मान्य एवं पंजीकृत डिग्री नहीं है, उन्हें तत्काल प्रभाव से चिकित्सा व्यवसाय करने से प्रतिबंधित किया गया है। इसके साथ ही जिले में संचालित ऐसे सभी क्लिनिक, नर्सिंग होम एवं अस्पताल जो मध्यप्रदेश उपचार्यगृह तथा रूजोपचार संबंधी स्थापनाएं अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत नहीं हैं, उनके संचालन पर भी पूर्ण रोक लगा दी गई है।
तत्काल प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के निर्देश
प्रशासन ने उन चिकित्सा व्यवसायियों पर भी सख्ती दिखाई है, जिन्हें संबंधित चिकित्सा परिषद एवं जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से अनुमति प्राप्त है, लेकिन वे स्वीकृत पद्धति से हटकर अन्य चिकित्सा पद्धति में इलाज कर रहे हैं। ऐसे मामलों में भी तत्काल प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
त्वरित व प्रभावी कार्रवाई जरुरी
कलेक्टर नीतू माथुर ने सभी अनुविभागीय दंडाधिकारी, खंड चिकित्सा अधिकारी एवं थाना प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र में इस आदेश का सख्ती से पालन कराएं और अवैध चिकित्सा गतिविधियों के खिलाफ त्वरित व प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें।
आगामी दो माह तक रहेगा लागू
यह प्रतिबंधात्मक आदेश 13 दिसंबर 2025 से प्रभावशील होकर आगामी दो माह तक लागू रहेगा। आदेश का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 सहित अन्य सुसंगत प्रावधानों के तहत अभियोजन की कार्रवाई की जाएगी।जिला प्रशासन के इस सख्त फैसले को ग्रामीण जनता के स्वास्थ्य और जीवन की सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है।


