सतना/अंकित शर्मा/खबर डिजिटल/ जिला अस्पताल के ब्लड बैंक से जुड़ी एक चौंकाने वाली और जानलेवा लापरवाही सामने आई है। थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे चार मासूम बच्चों को एचआईवी पॉजिटिव रक्त चढ़ा दिया गया, जिससे वे इस लाइलाज संक्रमण की चपेट में आ गए। मामला करीब चार महीने पुराना बताया जा रहा है, जो अब उजागर हुआ है।
नियमित रुप से चढ़ाना पड़ता है रक्त
थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को नियमित रूप से रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है। लेकिन अस्पताल के ब्लड बैंक ने जांच की अनिवार्य प्रक्रिया को नजरअंदाज करते हुए एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ा दिया। चार बच्चों के संक्रमित होने का अर्थ है कि कम से कम चार यूनिट रक्त एचआईवी पॉजिटिव था। इससे यह आशंका भी गहराती है कि इसी ब्लड बैंक से रक्त पाने वाले अन्य मरीज, जिनमें गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं, जोखिम में आ सकते हैं।
लापरवाही का आरोप
रक्त चढ़ाने से पहले एचआईवी जांच अनिवार्य होती है, बावजूद इसके संक्रमित रक्त का इस्तेमाल होना ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यह केवल एक तकनीकी चूक नहीं, बल्कि मानव जीवन के साथ खिलवाड़ है।
डोनर अब तक नहीं हुए ट्रेस
मामला सामने आने के बावजूद अब तक एचआईवी संक्रमित रक्तदाताओं का पता नहीं चल पाया है। तय प्रोटोकॉल के अनुसार डोनर चेन की जांच और ट्रेसिंग होनी चाहिए थी, लेकिन अस्पताल प्रबंधन, ब्लड बैंक और आईसीटीसी सेंटर की भूमिका संदेह के घेरे में है।
