सीधी/बृजेश पाण्डेय/खबर डिजिटल/ जिले की गोपद बनास तहसील अंतर्गत पडऱा पंचायत से भ्रष्टाचार का गंभीर मामला सामने आया है, जहां हल्का पटवारी पर जमीन का खसरा दर्ज कराने के बदले 50 हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगा है। हैरानी की बात यह है कि आरोप किसी आम नागरिक ने नहीं, बल्कि भारतीय थल सेना में कार्यरत एक सैनिक ने लगाया है। शिकायत के बावजूद अब तक न तो खसरा दर्ज हुआ, और न ही जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई ठोस कार्रवाई की है।
पटवारी पर रिश्वत मांगने का लगा आरोप
पडरा निवासी जगदीश प्रसाद पाण्डेय पिता संतोष पाण्डेय, जो वर्तमान में भारतीय थल सेना में सेवाएं दे रहे हैं, ने बताया कि उन्होंने गांव के ही देमान साहू से 30 वर्गफुट भूमि क्रय की थी। उक्त भूमि का आराजी नंबर 261/1 है। सभी वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद भी बंजारी हल्का के पटवारी दीपक शुक्ला द्वारा खसरा में नाम दर्ज नहीं किया गया। सैनिक का आरोप है कि पटवारी ने इस कार्य के लिए उनसे 50 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। रिश्वत देने से इंकार करने पर जानबूझकर खसरा प्रविष्टि रोक दी गई।
सैनिक ने की कलेक्टर से शिकायत
पीड़ित सैनिक ने इस मामले की शिकायत कलेक्टर सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों से की, लेकिन महीनों बीत जाने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। अंततः मजबूर होकर उन्होंने सीधी सांसद को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई। सांसद ने मामले को गंभीर मानते हुए कलेक्टर को पत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रकरण की पूरी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी लिखा गया है कि मामला एक सैनिक से जुड़ा है, इसलिए प्राथमिकता के आधार पर जांच कर उसे शीघ्र न्याय दिलाया जाए।
शपथ पत्र में साफ स्थिति
भूमिस्वामी देमान साहू पिता कलवा साहू ने शपथ पत्र देकर स्पष्ट किया है कि वे आराजी नंबर 261/1 रकबा 0.3260 हेक्टेयर भूमि के वैध स्वामी हैं। उन्होंने यह भी सहमति दी है कि उक्त भूमि से दक्षिण से उत्तर दिशा में, जगदीश प्रसाद पाण्डेय की भूमि के बगल से पूर्व दिशा में प्रस्तावित 15 फीट चौड़े रास्ते के लिए भूमि त्यजन पर उन्हें या उनके किसी वारिस को कोई आपत्ति नहीं है।
रिश्वत न मिलने से अटका काम!
सूत्रों का कहना है कि पूरा मामला साफ होने के बावजूद केवल रिश्वत न मिलने के कारण पटवारी द्वारा त्यजन आदेश और खसरा दर्ज नहीं किया जा रहा है। क्षेत्र में पदस्थ इस पटवारी के खिलाफ पहले भी कई शिकायतें सामने आ चुकी हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस बार क्या कार्रवाई करता है।


