राजगढ़/धर्मराज सिंह/खबर डिजिटल/ यहां मरना भी आसान नहीं है… यह वाक्य ग्राम सरेड़ी में घटी घटना पर सटीक बैठता है। एक बुजुर्ग महिला की मौत के बाद गांव में तांडव जैसे हालात बन गए। हालात इतने खराब हो गए कि अंतिम संस्कार तक करना मुश्किल हो गया।
शव को घंटों कंधे पर रखकर खड़े रहे ग्रामीण
मृत बुजुर्ग महिला की शव यात्रा को ग्रामीणों ने घंटों तक कंधों पर उठाए रखा, लेकिन मुक्तिधाम तक पहुंचने का रास्ता नहीं मिल सका। ग्रामीणों का आरोप है कि मुक्तिधाम जाने वाले शासकीय रास्ते पर अतिक्रमण कर लिया गया है, जिससे अंतिम यात्रा को बीच रास्ते में ही रोकना पड़ा।
प्रशासन के खिलाफ जताई नाराजगी
बताया जा रहा है कि जैसे ही शव यात्रा मुक्तिधाम की ओर बढ़ी, अतिक्रमणधारियों ने रास्ता बंद कर दिया और अंतिम यात्रा को आगे जाने से रोक दिया। इस घटना से गांव में भारी आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई की गई होती तो ऐसी शर्मनाक स्थिति नहीं बनती।
सरपंच ने जेसीबी से बनवाया रास्ता
अंततः स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरपंच ने पुलिस की मौजूदगी में जेसीबी मशीन की मदद से रास्ता बनवाया, तब जाकर अंतिम संस्कार संभव हो सका। मौके पर तहसीलदार सहित राजगढ़ कोतवाली पुलिस बल मौजूद रहा।
प्रशासन की भूमिका क्या है?
घटना के बाद गांव में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि शासकीय रास्तों पर हो रहे अतिक्रमण को लेकर प्रशासन की लापरवाही सामने आई है। अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि मौत के बाद भी सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए संघर्ष करना पड़े, तो प्रशासन की भूमिका क्या है?


