केवलारी/संतोष बंदेवार/खबर डिजिटल/ थांवरी नगर में आयोजित दिव्य संगीतमय पावन कथा के क्रम में पांचवें दिवस भी श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति देखने को मिली। कथा स्थल श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना से सराबोर नजर आया। कथा व्यास पूज्य महाराज श्री ने आज कर्म, धर्म और भक्ति के गहन रहस्यों पर प्रकाश डालते हुए श्रोताओं को आत्मचिंतन का संदेश दिया।
कर्मों की पराकाष्ठा
अपने ओजस्वी प्रवचन में महाराज श्री ने कहा कि “ना कंस को श्रीकृष्ण ने मारा, ना रावण को श्रीराम ने, उनका अंत उनके ही कर्मों ने किया।” उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान तो केवल निमित्त मात्र होते हैं, वास्तविक फल मनुष्य को अपने ही कर्मों के अनुसार प्राप्त होता है। शुभ कर्म जीवन को मंगलमय बनाते हैं, जबकि अशुभ कर्म विनाश का कारण बनते हैं। आज की कथा में भगवान श्री गणेश के ऋद्धि एवं सिद्धि के साथ विवाह का दिव्य प्रसंग भी अत्यंत भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया। महाराज श्री ने बताया कि ऋद्धि जीवन में समृद्धि का प्रतीक है और सिद्धि सफलता का। जब भक्ति के साथ जीवन में ऋद्धि-सिद्धि का समावेश होता है, तब मानव जीवन पूर्णता को प्राप्त करता है।
श्रोताओं को किया भाव-विभोर
महाराज श्री की मधुर वाणी, सरल उदाहरणों और भावपूर्ण प्रस्तुति ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। कथा पंडाल में पूरे समय भक्ति, श्रद्धा और आनंद का वातावरण बना रहा। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन कर भगवान श्री गणेश एवं प्रभु का स्मरण किया। कथा आयोजन के चलते नगर में धार्मिक चेतना का व्यापक संचार हो रहा है। प्रत्येक दिवस श्रद्धालुओं की संख्या में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है, जिससे आयोजन की भव्यता और आध्यात्मिक प्रभाव और अधिक प्रबल होता जा रहा है।


