बड़वानी/संदीप कुशवाह/खबर डिजिटल/ जिले के सेंधवा में नववर्ष के पावन अवसर पर नगर में सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य शुभारंभ श्रद्धा, भक्ति और उल्लासपूर्ण वातावरण में हुआ। कथा के प्रथम दिन निंबार्काचार्य श्रीजी महाराज श्री श्यामशरण देवाचार्य ने कथा वचन में कहा कि मां नर्मदा के निकट भागवत कथा होना परम सौभाग्य पूर्ण है। साथ ही निंबार्काचार्य पीठाधीश्व श्री राधासर्वेश्वर शरणदेवचार्य श्री श्रीजी महाराज के निकुंज प्रवेश तिथि व स्व. विष्णुप्रसाद यादव की स्मृति में जिनका सम्पूर्ण जीवन हमेशा गौ सेवा, संत सेवा, मानव सेवा में अग्रणी रहे इसे भक्त की स्मृति में भागवत कथा होना। परम सौभाग्य है। मानव जीवन के सार्थक करने के लिए भगवान का स्मरण करने से हमारे जीवन का कल्याण होता है। भगवान की दिव्य कथा से ही जीवन का कल्याण होता है पुण्य मिलता है जब हमें भागवत कथा का पुण्य मिलता है।
भागवत जी का किया पूजन
कथा के पहले दिन कथा आयोजक स्व. विष्णुप्रसाद यादव के परिजन नपा अध्यक्ष बसंती बाई यादव, पुत्र संजय यादव, जितेंद्र यादव, श्रीप्रसाद यादव ने भागवत का और
अंतरसिंह आर्य, सत्यनारायण यादव, ओमप्रकाश यादव, वासुदेव यादव, प्रहलाद यादव, दामोदर शर्मा, जयंत शर्मा, राजेंद्रसिंह रघुवंशी, चेतन अग्रवाल, राजेश सोनी, नरेंद्र तायल, डॉ दिनेश गौड़, गिरवर शर्मा, राजेंद्र शर्मा, गोपाल यादव, चंदेभागे किराड़े, मोतीलाल चौधरी, श्याम लाठी हरदा ने पूजन कर गुरुजी का आशीर्वाद लिया ।
पूरे नगर में भक्तिमय माहौल
कथा के शुभारंभ से पूर्व राजराजेश्वर मंदिर से भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसने पूरे नगर को भक्तिमय बना दिया। शोभायात्रा जिस मार्ग से गुजरी, वहां स्वागत के लिए बैनर-पोस्टर लगाए गए, गुब्बारों से सड़क को सजाया गया तथा जगह-जगह आकर्षक रंगोलियां बनाई गईं। मार्ग में विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं श्रद्धालुओं द्वारा पुष्प वर्षा कर निंबार्काचार्य जी, भागवत कथा पोथी एवं शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत किया गया। भागवत कथा के यजमान जितेंद्र यादव सपत्नी श्रद्धापूर्वक भागवत कथा की पोथी को मस्तक पर धारण कर निंबार्काचार्य श्री श्रीजी महाराज श्री श्यामशरण देवाचार्य के साथ पैदल चलते हुए नजर आए, जो श्रद्धालुओं के लिए आस्था का विशेष केंद्र रहे।
शोभायात्रा में भव्य नजारा
शोभायात्रा में सबसे आगे बैंड-बाजों के साथ अलीराजपुर से आए आदिवासी युवक-युवतियां पारंपरिक वेशभूषा में लोक नृत्य करते हुए चल रहे थे। जिला जनपद सदस्य कविता आर्य एवं जनपद अध्यक्ष लता पटेल भी आदिवासी पोशाक में लगभग 100 से अधिक जनजातीय महिलाओं के साथ शोभायात्रा में शामिल हुईं, जिससे सामाजिक समरसता का सुंदर संदेश दिया गया। शोभायात्रा में श्रीकृष्ण-राधा की सजीव झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। वहीं देश की चार वीर वीरांगनाएं घोड़े पर सवार होकर निकलीं, जिन्होंने शौर्य और नारी शक्ति का संदेश दिया। बग्गी में बड़े गुरुजी अनंत श्रीविभूषित जगद्गुरु निम्बार्काचार्य पीठाधीश्वर श्री राधासर्वेश्वरशरणदेवाचार्य श्री “श्रीजी” महाराज का चित्र विराजमान था, जिसके पीछे 171 महिलाएं धार्मिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर चल रही थीं। बड़ी संख्या में महिलाएं हाथों में केसरिया ध्वज लहराते हुए भक्तिभाव के जयकारे लगाती रहीं।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु हुए शामिल
शोभायात्रा में बड़ी संख्या में नगरवासी एवं श्रद्धालु शामिल हुए। यह शोभायात्रा दोपहर 12.15 बजे राजराजेश्वर मंदिर से प्रारंभ होकर लगभग 1.30 बजे कथा स्थल पर पहुंची। कथा स्थल के समीप निंबार्काचार्य श्रीजी महाराज श्री श्यामशरण देवाचार्य की कुटिया बनाई गई है, जहां धार्मिक वातावरण को साकार करने हेतु गाय-बछड़े को भी रखा गया है। पंडाल के पास भगवान श्रीकृष्ण की आकर्षक झांकी सजाई गई है, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। सात दिनों तक चलने वाली इस संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा से नगर में आध्यात्मिक चेतना का संचार हो रहा है और श्रद्धालु बड़ी संख्या में कथा श्रवण के लिए उमड़ रहे हैं।


