हर गरीब को सम्मानजनक रोजगार देना सरकार का संकल्प : राव उदय प्रताप सिंह
कटनी – जिले के प्रभारी मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में जी-राम-जी योजना को लेकर आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य हर गरीब को रोजगार देना और उसकी गरिमा का सम्मान करना है। उन्होंने कहा कि गरीब, जनजातीय एवं पिछड़ा वर्ग को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए यह कानून लाया गया है।
प्रभारी मंत्री ने कहा कि यह योजना ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप ग्रामीण विकास का नया ढांचा तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पूरा बिल महात्मा गांधी जी की भावना के अनुरूप है और रामराज्य की अवधारणा को साकार करने के उद्देश्य से लाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कांग्रेस और इंडी गठबंधन को विकसित भारत और भगवान राम के नाम से इतनी नफरत क्यों है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कितनी भी साजिश कर ले, देश 2047 तक विकसित भारत बनकर रहेगा।
राव उदय प्रताप सिंह ने बताया कि नई रोजगार योजना में काम के दिन बढ़ाए जाएंगे और मजदूरों को पारिश्रमिक भी समय पर मिलेगा। हर ग्रामीण परिवार को प्रतिवर्ष 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी जाएगी। वहीं वन क्षेत्र में कार्य करने वाले अनुसूचित जनजाति के श्रमिकों को 25 दिन का अतिरिक्त रोजगार मिलेगा।
उन्होंने कहा कि मनरेगा पर अब तक 11.74 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जिसमें से 8.53 लाख करोड़ रुपये मोदी सरकार द्वारा खर्च किए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि रोजगार योजनाओं के नामकरण को लेकर कांग्रेस भ्रम फैला रही है। वर्ष 1980 में इंदिरा गांधी सरकार ने सभी योजनाओं को मिलाकर राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम बनाया, जिसे बाद में राजीव गांधी ने जवाहर रोजगार योजना नाम दिया। वर्ष 2004-05 में कांग्रेस सरकार ने इसे एनरेगा और फिर मनरेगा नाम दिया। उन्होंने सवाल किया कि जब कांग्रेस ने जवाहर रोजगार योजना का नाम बदला था, तब क्या वह पंडित जवाहरलाल नेहरू का अपमान नहीं था?
इसी प्रकार, ग्रामीण आवास योजना का नाम बदलकर इंदिरा आवास योजना किया गया और ग्रामीण विद्युतीकरण योजना का नाम राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना रखा गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हर योजना में गांधी-नेहरू परिवार के नाम जबरन जोड़े, जबकि मोदी सरकार में नाम नहीं, काम बोलता है।
प्रभारी मंत्री ने कहा कि 2005 में शुरू हुई मनरेगा के बाद अब ग्रामीण भारत में व्यापक बदलाव आया है। वर्ष 2011-12 में ग्रामीण गरीबी 25.7 प्रतिशत थी, जो 2023-24 में घटकर 4.86 प्रतिशत रह गई है। कनेक्टिविटी बढ़ी है और आजीविका के नए अवसर बने हैं। ऐसे में पुराने ओपन-एंडेड मॉडल को 2025 की जरूरतों के अनुसार पुनः व्यवस्थित करना आवश्यक हो गया था।
उन्होंने बताया कि कांग्रेस शासनकाल में मनरेगा में पारदर्शिता का अभाव था, जबकि अब रियल-टाइम डेटा अपलोड, GPS व मोबाइल मॉनिटरिंग तथा AI आधारित फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम लागू किया जाएगा, जिससे सही लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचेगा।
पत्रकार वार्ता में भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक टंडन सोनी, मुड़वारा विधायक संदीप जायसवाल, बहोरीबंद विधायक प्रभात पांडे, बड़वारा विधायक धीरेंद्र सिंह, महापौर प्रीति संजीव सूरी, निगमाध्यक्ष मनीष पाठक, पूर्व जिलाध्यक्ष पीतांबर टोपनानी, पूर्व महापौर शशांक श्रीवास्तव एवं जिला उपाध्यक्ष रम्मू साहू सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
हर गरीब को सम्मानजनक रोजगार देना सरकार का संकल्प : राव उदय प्रताप सिंह
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