डिंडौरी/ शैलेश नामदेव/ खबर डिजिटल: डिंडौरी जिले की शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने सख्त एक्शन लेते हुए प्राथमिक शाला भीमडोंगरी में पदस्थ सहायक शिक्षक सरिता मेरावी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
ग्रामीण बोले- “मैडम आती ही नहीं”
इस बड़ी कार्रवाई की पटकथा 09 जनवरी 2026 को लिखी गई, जब अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) शहपुरा ने भीमडोंगरी स्कूल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सहायक शिक्षक सरिता मेरावी अनुपस्थित पाई गईं। जब अधिकारियों ने उपस्थिति पंजी खंगाली और ग्रामीणों से चर्चा की, तो बेहद निराशाजनक तथ्य सामने आए। ग्रामीणों ने बताया कि शिक्षिका पिछले डेढ़ महीने से स्कूल नहीं आ रही थीं, जिससे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप पड़ी थी।
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बिना बताए गायब रहना पड़ा भारी
प्रशासनिक जांच में पाया गया कि शिक्षिका न तो कोई अवकाश लिया था और न ही किसी सक्षम अधिकारी को सूचना दी थी। इस अनाधिकृत अनुपस्थिति को विभाग ने बेहद गंभीरता से लिया है:पेंशन नियम 1976 के तहत इसे सेवा में व्यवधान माना गया है। इसे मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 का खुला उल्लंघन और ‘गंभीर कदाचार’ की श्रेणी में रखा गया है।
निलंबन और मुख्यालय निर्धारण
कलेक्टर के कड़े निर्देशों के बाद सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग ने निलंबन आदेश जारी कर दिए। मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत की गई इस कार्रवाई के दौरान सरिता मेरावी को तत्काल प्रभाव से पद से निलंबित किया गया है। निलंबन काल में उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय (BEO) शहपुरा तय किया गया है। उन्हें नियमानुसार केवल जीवन निर्वाह भत्ता ही प्राप्त होगा।
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कलेक्टर ने कहा – “बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ मंजूर नहीं”
डिंडौरी कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने कहा कि ग्रामीण अंचलों के स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। यदि कोई भी शिक्षक बिना सूचना के गायब रहता है या अपनी ड्यूटी के प्रति लापरवाह पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध इसी तरह की कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई के बाद से जिले के अन्य शासकीय विभागों और स्कूलों में हड़कंप मचा हुआ है।
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