भोपाल : राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने मध्य प्रदेश की ग्रामीण समृद्धि और आर्थिक विकास को गति देने के लिए ‘स्टेट फोकस पेपर 2026-27’ जारी किया है। भोपाल के ऐतिहासिक मिंटो हॉल में आयोजित ‘स्टेट क्रेडिट सेमिनार’ में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य की कुल प्राथमिकता क्षेत्र ऋण क्षमता ₹3,75,384.29 करोड़ आंकी गई है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के सहकारिता मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग और कृषि मंत्री श्री आदल सिंह कंसाना उपस्थित रहे।
कृषि और MSME: अर्थव्यवस्था के दो मजबूत स्तंभ स्टेट फोकस पेपर (SFP) के अनुसार, मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि का दबदबा बरकरार है, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में 44.36% का महत्वपूर्ण योगदान देती है। ऋण क्षमता का वितरण इस प्रकार है:
- कृषि क्षेत्र: कुल ₹2,08,743.78 करोड़ का आवंटन, जिसमें फार्म क्रेडिट, सिंचाई और कृषि बुनियादी ढांचा शामिल है।
- MSME क्षेत्र: छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए ₹1,46,269.36 करोड़ की क्षमता का अनुमान।
- अन्य क्षेत्र: शिक्षा, आवास, निर्यात क्रेडिट और नवीकरणीय ऊर्जा के लिए ₹20,371.15 करोड़ रखे गए हैं।
मजबूत वित्तीय इकोसिस्टम और नाबार्ड की उपलब्धियां नाबार्ड की मुख्य महाप्रबंधक श्रीमती सी. सरस्वती ने बताया कि राज्य ने वर्ष 2024-25 में 6.05% की विकास दर के साथ ₹15.03 लाख करोड़ का GSDP दर्ज किया है। नाबार्ड के विकासात्मक हस्तक्षेपों के प्रमुख बिंदु:
- वित्तीय सहायता: वर्ष 2024-25 के दौरान ₹27,331 करोड़ की सहायता प्रदान की गई।
- ग्रामीण बुनियादी ढांचा: RIDF के तहत राज्य सरकार को ₹4,132 करोड़ दिए गए।
- FPO और डिजिटल परिवर्तन: 426 किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को बढ़ावा दिया गया और 4,535 PACS का सफलतापूर्वक कम्प्यूटरीकरण किया गया।
- जल और आदिवासी विकास: 90 वाटरशेड परियोजनाओं और 103 आदिवासी विकास (WADI) परियोजनाओं से लाखों परिवारों को लाभ पहुँचाया गया।
समावेशी विकास की ओर कदम सेमिनार का उद्देश्य नीति निर्माताओं और बैंकरों के बीच समन्वय स्थापित कर वार्षिक क्रेडिट योजना (ACP) 2026-27 को अंतिम रूप देना है। आरबीआई की रीजनल डायरेक्टर सुश्री रेखा चंदनवेली और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में नाबार्ड ने सहभागी क्रेडिट योजना और डिजिटल परिवर्तन के माध्यम से ग्रामीण मध्य प्रदेश में स्थायी समृद्धि लाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।


