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Friday, April 17, 2026
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MP Special News: कनुप्रिया सत्तन ने क्यों लिया कांग्रेस में जाने का निर्णय… क्या भंवर सिंह शेखावत पार्ट-टू दोहराया गया?

विधानसभा-1 से लड़ सकती है विधानसभा चुनाव

इंदौर/नरेंद्र महावर/खबर डिजिटल/ 17 फरवरी का दिन एमपी समेत इंदौर की सियासत से लिए बेहद ही खास था, क्योंकि इस दिन बीजेपी में ‘गुरु’ के रुप में पहचाने जाने वाले सत्यनारायण सत्तन की बेटी कनुप्रिया सत्तन ने कांग्रेस का दामन थाम लिया। कनुप्रिया के इस कदम के बाद सवाल खड़ा हुआ कि इतने पुराने भगवा ब्रिगेड वाले परिवार से ताल्लुक रखने वाले परिवार की बेटी ने यह कदम क्यों उठाया, हालांकि इस पर पूर्व विधायक सत्यनारायण सत्तन का बयान सामने आया कि कनुप्रिया अपना निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है, वो पढ़ी-लिखी है, यह फैसला उसी ने लिया है, और कांग्रेस के खेमे में शामिल हो गई है।

कनुप्रिया ने खुद को बताया इंदिरा गांधी से प्रेरित
कांग्रेस की सदस्यता लेने के बाद कनुप्रिया सत्तन ने साफ किया कि वो इंदिरा गांधी के व्यक्तित्व से प्रेरित होकर कांग्रेस में शामिल हुईं है, हालांकि इसके पीछे इंदौर की ही वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री और महिला कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अर्चना जायसवाल की बड़ी भूमिका बताई जा रही है, जिनकी उपस्थिति में कनुप्रिया ने कांग्रेस का दाम थामा, इस दौरान पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने भी उनसे मुलाकात की, और कांग्रेस में आने पर स्वागत किया। बताया जा रहा है कि करीब 6 महीने से सत्तन अर्चना जायसवाल के संपर्क में थी, और उन्होंने इंदिरा गांधी सम्यक अभियान के तहत कई महिलाओं को कांग्रेस से जोड़ा है।

जबरदस्त वक्ता हैं कनुप्रिया सत्तन
कनुप्रिया सत्तन के पिता सत्यनारायण सत्तन को बीजेपी के प्रखर वक्ता माना जाता है, जोकि राष्ट्रीय कवि के रुप में प्रख्यात हैं, इसी तरह से उनकी बेटी में भी वंशानुगत एक बेहतर वक्ता हैं, विभिन्न विषयों पर उनकी गहरी पकड़ है। उनके पति कॉन्ट्रेक्टर हैं और वो दो बच्चों की मां है। कनुप्रिया की प्रतिभा को ध्यान में रखकर कांग्रेस ने उन्हें प्रदेश प्रवक्ता भी बना दिया है, जोकि बीजेपी को घेरने का काम करेंगी। साथ ही कांग्रेस की नीति को भी जनता तक पहुंचाने में मदद करेंगी।

सत्यनारायण सत्तन ने किया साफ
गुरुजी के नाम से विख्यात सत्यनारायण सत्तन ने बेटी के कांग्रेसी बनने को लेकर कहा कि उन्होंने कन्यादान कर दिया है, उनकी बेटी उच्च शिक्षित है, एक पत्रकार है, वो खुद अपने निर्णय ले सकती है, वे किसी के निर्णय में बाधक नहीं बन सकते हैं। साथ ही उन्होंने खुलासा किया कि उनके पिता खुद कांग्रेसी थे और जब वो बीजेपी के साथ गए थे, तो उनकी बेटी ने कौनसा अपराध कर दिया। साथ ही उन्होंने बयानों में अपनी छिपी पीड़ा को भी जाहिर कर दिया कि बीजेपी में जाती तो उसको क्या मिलता, इसे बीजेपी पर एक तंज के रुप में माना जा रहा है। जानकारों के मुताबिक एक और बात निकलकर सामने आ रही है कि सत्यनारायण सत्तन काफी दिनों से अपनी पार्टी से नाराज चल रहे थे, जिसे उनकी बेटी ने महसूस करने का काम किया है।

भाजपा नेताओं को गरियाते रहे हैं सत्यनारायण सत्तन
बीजेपी के वरिष्ठ नेता सत्यनारायण सत्तन समय-समय पर अपनी पार्टी के नेताओं को गरियाते रहे हैं, जिन्होंने साल 1980 में कांग्रेस विधायक चंद्रशेखर व्यास की मौत के बाद उपचुनाव में बीजेपी के टिकट पर कांग्रेस के कृपाशंकर शुक्ला को हराया था। उनके चुनाव प्रचार के लिए अटलबिहारी वाजपेयी भी इंदौर आए थे, हालांकि बीते सालों में वे नगराध्यक्ष के चुनाव में रमेश मेंदोला से हार गए थे, बाद में सत्तन शिवराज सरकार में खादी ग्रामोद्योग के अध्यक्ष बने और उसके बाद लगातार हाशिये पर चले गए। कई बार सार्वजनिक मंचों से उनके तंजों ने चौंकाया है, जैसे एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के काफिले की आवाज आने पर पीं..पीं बोलकर तंज कसा था। उनके करीबी बताते हैं कि सत्तन की पीड़ा है कि पार्टी जिन सिद्धांतों को लेकर चली थी, उसको अब पीछे छोड़ दिया गया है, सत्ता पाने के लिए जोड़-तोड़ का बोलबाला है।

क्या भंवर सिंह शेखावत पार्ट-2 है कनुप्रिया सत्तन प्रसंग?
राजनीतिक जानकारों के अनुसार इंदौर की सियासत में 1980-90 के दशक में सत्यनारायण सत्तन, विष्णुप्रसाद शुक्ला, नारायण धर्म, सुमित्रा महाजन जैसे नेताओं को अग्रणी माना जाता था, तो 90 के दशक के बाद इंदौर की सियासत में भंवर सिंह शेखावत, कैलाश विजयवर्गीय, लक्ष्मण सिंह गौड़, महेंद्र हार्डिया जैसे नेताओं का उदय हुआ। उसके बाद ताई-भाई यानी सुमित्रा महाजन और कैलाश विजयवर्गीय की अदावत के चलते भंवर सिंह शेखावत जैसे नेताओं को हाशिये पर जाना पड़ा, यहां तक उन्हें इंदौर छोड़कर धार के बदनावर जाकर बीजेपी की सियासत करना पड़ी, लेकिन अंत में वो कांग्रेस के टिकट पर बदनावर से ही विधायक हैं, जोकि विधानसभा में बीजेपी सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ते, ठीक इसी तरह से माना जा रहा है कि बीजेपी की अंदरुनी कड़ी प्रतिस्पर्धा और गुटबाजी का असर ही कनप्रिया सत्तन को कांग्रेस के दरवाजे तक ले गया।

इंदौर विधानसभा-1 से प्रत्याशी हो सकती हैं कनुप्रिया सत्तन?
इंदौर की विधानसभा-1 से फिलहाल मंत्री कैलाश विजयवर्गीय विधायक हैं, इससे पहले इस सीट पर कांग्रेस ने फतह हासिल की थी, संजय शुक्ला कांग्रेस के विधायक थे, जिन्होंने सुदर्शन गुप्ता से इस सीट को छीना था, किंतु अब वो बीजेपी के खेमे में हैं, जिसके चलते इस सीट पर कांग्रेस को कनुप्रिया सत्तन के रुप में एक मजबूत महिला उम्मीद्वार मिल गया है, हालांकि टिकट की प्रतिस्पर्धा में रामलाल भल्लू यादव के परिवार से उनका सामना भी हो सकता है, जहां विधानसभा-1 के वार्ड 10 से उनकी बहू विनितिका दीपू यादव सालों से पार्षद हैं।

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