नई दिल्ली/खबर डिजिटल/ देशभर में आने वाले विधानसभा चुनावों और लगातार राजनीतिक घटनाक्रमों के दौर में रैलियों का बोलबाला नजर आ रहा है। इसी कड़ी में फरवरी के अंत में शनिवार 28 फरवरी को मोदी-राहुल अलग राज्यों में अपनी हुंकार भरने वाले हैं, तो अरविंद केजरीवाल 1 मार्च को दिल्ली के जंतर-मंतर से ‘रोजगार दो-सामाजिक न्याय दो’ महारैली के जरिए गरजेंगे। रैलियों के इस दौर में साफतौर पर दिग्गजों के बीच जंग होती दिखाई दे रही है, जिसकी झलक संसद के बजट सत्र में दिखी, तो अरविंद केजरीवाल को कथित शराब घोटाले में दोषमुक्त करने के बाद सियासी परिस्थितियों में नया मोड़ आता नजर आ रहा है।
राजस्थान के अजमेर में दहाड़ेंगे पीएम मोदी
प्रधानमंत्र नरेंद्र मोदी अजमेर के कायड़ विश्राम स्थली में विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे, यहां पर वे अजमेर में शहरी विकास, राष्ट्रीय राजमार्ग, पेयजल परियोजनाएं, ऊर्जा ग्रिड, औद्योगिक क्षेत्र, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी 16 हजार 680 करोड़ रुपए की विभिन्न विकास परियोजनाओं का शुभारंभ, उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इसके अलावा पीएम मोदी 14 वर्ष की आयु की लड़कियों के लिए ह्यूमन पेपीलोमा वायरस (एचवीपी) टीकाकरण के लिए राष्ट्रीयव्यापी अभियान की शुरुआत भी करेंगे, जिसका उद्देश्य महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम करना है।
पंजाब में राहुल गांधी की ‘किसान मजदूर रैली’
लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी शनिवार 28 फरवरी को पंजाब के बरनाला में ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ और ‘किसान मजदूर रैली’ को संबोधित करेंगे। इस रैली के पीछे कांग्रेस उद्देश्य आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए कैम्पेन की धमाकेदार शुरुआत करना है। राहुल गांधी के बरनाला आगमन पर कांग्रेसियों में काफी जोश दिखाई दिया। अपने दौरे के दौरान राहुल गांधी केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा (महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट) में किए गए बदलावों और भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट के मुद्दे पर बोलेंगे,पार्टी इन फैसलों को पंजाब के किसानों और मजदूरों के लिए नुकसानदायक बता रही है।
केजरीवाल की 1 मार्च को दिल्ली में ‘महारैली’
केजरीवाल कोर्ट के फैसला आने के बाद उत्साहित नजर आए, उन्होंने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि 1 मार्च को जंतर-मंतर पर एक विशाल ‘रोजगार दो-सामाजिक न्याय दो’ रैली आयोजित की जाएगी। उन्होंने भाजपा सरकार पर दिल्ली में बस मार्शल, मोहल्ला क्लिनिक कर्मचारियों और डेटा एंट्री ऑपरेटरों को नौकरी से निकालने का आरोप लगाया। साथ ही बताया कि ‘विक्टिम कार्ड’ के बजाय अब वे ‘क्लीन चिट’ को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाकर जनता के बीच जाएंगे। दिल्ली की सियासत में यह फैसला एक निर्णायक मोड़ साबित होने वाला है।


