उज्जैन/खबर डिजिटल/ अगर आपके पास 250 रुपये नहीं है, तो आप अवंतिका नगरी के राजा बाबा महाकाल की संध्या और शयन आरती में शामिल नहीं हो पाएंगे। भक्तों की मुराद सुनने वाले भगवान महाकालेश्वर से पहले उनकी आरतियों में शामिल होने के लिैए गुजारिश की जाएगी कि ‘हे भगवान पहले हमें घर से ही प्रति व्यक्ति अतिरिक्त 250 रुपये देना ताकि आपकी भस्मारती, शयन आरती और संध्या आरती में शामिल हो सके। जीहां हम उसी फैसले की बात कर रहे हैं, जिसका अब पुरजोर तरीके से विरोध हो रहा है, और जनप्रतिनिधि भी पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं।
भक्तों ने बताया ‘तुगलकी फरमान’
उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की संध्या और शयन आरती में शामिल होने के लिए 250 रुपये का पास लेना होगा। मंदिर समिति ने भस्म आरती की तर्ज पर अन्य आरतियों के दर्शन की नई व्यवस्था शुरू की है। जिसके पीछे समिति को रोजाना 6 लाख रुपये की अतिरिक्त आय होने का हवाला दिया जा रहा है, यानी कुल मिलाकर हर महीने 1 करोड़ 80 लाख रुपये और सालाना 22 करोड़ की आय होगी। इस आय को लेकर अब जनप्रतिनिधि से लेकर मंदिर के पुजारी ही आवाज उठा कहे हैं, भक्तों का विरोध तो शुरु दिन से ही जारी है।
ऑनलाइन व्यवस्था या वीआईपी कल्चर
रोजाना देखा जाता है कि महाकाल मंदिर में एक ना एक वीआईपी दर्शन करने आता है, कभी राजनेता, फिल्म अभिनेता-अभिनेत्री, क्रिकेट स्टार तो कभी अन्य क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान रखने वाले भक्त, इनका स्वागत करते फोटो और वीडियो जमकर वायरल किए जाते हैं, मंदिर समिति जमकर स्वागत करती है, लेकिन क्या सवाल नहीं बनता कि एक आम भक्त अगर आए तो उसका भी ऐसा ही स्वागत हो, जबकि अब महाकाल लोक बनने के बाद से लगातार भक्तों की संख्या बढ़ती जा रही है , लेकिन इस तरह किसी को ध्यान नहीं कि भक्त पर्यटन के लिए नहीं, अपनी आस्था लेकर महाकाल के दर पर आते हैं, तो ऐसे में वीआईपी कल्चर का अंत करने के लिए अब वो ही बाबा महाकाल से गुजारिश कर रहे हैं।
प्रशासनिक फरमान की किसको जानकारी?
महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने साफ किया कि अब शयन और संध्या आरती में शामिल होने के लिए 250 रुपये देना पड़ेगा, हालांकि अब इस जनप्रतिनिधियों समेत मंदिर समिति ने अनभिज्ञता जाहिर की है, महापौर मुकेश टटवाल कहना है कि उनको मंदिर समिति के पदेन सदस्य होने के बाद भी नए शुल्क लगाने की जानकारी नहीं दी गई, धर्मस्व मंत्री धर्मेंद्र लोधी ने भी निर्णय पर असहमति जाहिर की, और भक्तों के साथ अन्याय नहीं होने देने की बात कही, साथ ही मंदिर के पुजारी भी निर्णय के खिलाफ दिखाई दिए।
श्रद्धालुओं ने जाहिर की कड़ी नाराजगी
भगवान महाकालेश्वर के भक्तों का कहना है कि वो सालों से भस्मारती की बजाय संध्या या शयन आरती में शामिल होते रहे हैं, ऐसे में हर बार 250 रुपये का शुल्क चुकाना उनकी आस्था के साथ सीधा-सीधा खिलवाड़ है, जिस पर तत्काल सही निर्णय लिया जाना चाहिए। यहां तक कि भक्तों ने यह तक कह दिया कि पैसों के नाम पर भक्ति का बंटवारा किया जा रहा है, ऐसे निर्णय पर महाकाल भगवान ही फैसला करेंगे, और जल्द से जल्द इसे रद्द कराने के लिए उनकी मदद करेंगे।


