भोपाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश में एक समय शराबबंदी को लेकर दावे किए जा रहे थे, एक भगवाधारी पूर्व मुख्यमंत्री ने शराब की दुकान पर पत्थर बरसाए थे, अहातों के नाम पर होने वाली परेशानी का बहाना बनाकर उन्हें बंद कर दिया गया, शराब की अतिरिक्त दुकानें नहीं खोलने के नाम पर एक दुकान को धीरे से दो कर दिया, मतलब सीधे-सीधे डबल, वो भी कम्पोजिट शराब दुकान के नाम पर पर, वहीं अब एक आंकड़े ने चौंका दिया है, कि प्रदेश को सबसे ज्यादा कमाई शराब बेचकर ही हो रही है, रजिस्ट्री दूसरे नंबर पर है, तो कहा जा सकता है कि अगर शराबी ने शराब नहीं पी, तो सूबे की अर्थव्यवस्था चौपट तक हो सकती है।
शराब से आमदनी का आंकड़ा
मध्यप्रदेश के मौजूदा वित्तीय वर्ष का आंकड़ा देखे तो शराब से सबसे ज्यादा कमाई हुई है। दिसंबर तक वित्तीय वर्ष की अवधि में कुल 16.83% वृद्धि के साथ आबकारी विभाग से मिली आय सबसे अधिक रही है, जोकि पिछले साल के मुकाबले अधिक है। दूसरी तरफ रजिस्ट्री से हुई आमदनी भी बीते साल की तुलना में 11.42% बढ़ गई है। जबकि जीएसटी से आमदनी में कमी दर्ज की गई, जोकि 0.78% घट गई है। इन आंकड़ों के अनुसार व्यापारिक गतिविधियों में शराब बेचने लाभ का धंधा साबित हुआ है।
शराब की कमाई में जबरदस्त उछाल
एमपी में मौजूद वित्तीय वर्ष में दिसंबर तक शराब से कमाई का ग्राफ बढ़ गया है। बात करें पिछले वक्त की, तो साल 2024-25 में दिसंबर तक जहां शराब से कमाई 10 हजार 577 करोड़ थी, ये मौजूदा वित्तीय वर्ष की इसी अवधि तक 12 हजार 357 करोड़ हो गई। 2024-25 में आबकारी विभाग से की आय 15 हजार 258 करोड़ थी, जबकि 2023-24 में ये 13 हजार 590 करोड़ थी। वहीं, 2022 -23 में विभाग की कुल कमाई साढ़े 13 करोड़ थी। इसी तरह रजिस्ट्री के जरिए भी आय में बढ़ोतरी दर्ज की गई, मौजूदा वित्तीय वर्ष में दिसंबर तक 8 हजार 656 करोड़ से ऊपर हो चुकी है। इसी अवधि में बीते साल के मुकाबले ये आमदनी 11.42 प्रतिशत अधिक है।
देश में बढ़ा रहा जीएसटी, एमपी क्यों पीछे?
जीएसटी से होने वाली आय का आंकड़ा राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रहा है, लेकिन मध्यप्रदेश में यह घटा है, सितम्बर 2025 में केंद्र ने जीएसटी व्यवस्था में बदलाव करते हुए 12% और 28 % की दरों को खत्म कर दिया था। लक्जरी -सिन गुड्स के लिए 40 % का नया स्लैब तैयार किया गया था। वित्त मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर तक देश में जीएसटी कलेक्शन बीते साल के मुकाबले 6.1 प्रतिशत तक बढ़ते हुए 1.74 प्रतिशत लाख करोड़ रहा है, जबकि मप्र में ये 0.78 प्रतिशत घट गया है।


