P?c1=2&c2=41463588&cv=3.9
Friday, April 17, 2026
No menu items!
spot_img
Homeमध्यप्रदेशखबर डिजिटल की खबर का बड़ा असर… वन विभाग ने माना- हुई...

खबर डिजिटल की खबर का बड़ा असर… वन विभाग ने माना- हुई गलती, वन रक्षक भर्ती परीक्षा 2026 का मामला

कर्मचारी चयन मंडल ने भी रखा पक्ष

भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) की वनरक्षक भर्ती परीक्षा 2026 का विज्ञापन जारी किया गया था, इसको देखकर अनुसूचित जाति वर्ग के अभ्यर्थियों ने निराशा जाहिर की थी, खबर डिजिटल की टीम को कई माध्यमों उन्होंने अपनी पीड़ा जाहिर की थी, जिसके बारे में सबसे पहले हमने खबर प्रकाशित की थी, उसमें बताया था कि किस तरह से एक वर्ग को पूरी तरह से वन रक्षक बनने के सपने से महरुम कर दिया गया।

वन विभाग ने मानी गलती
वन विभाग में कुल 728 वनरक्षक पदों पर नियुक्ति की जाएगी। इसमें सामान्य वर्ग के लिए कुल 310, अनुसूचित जनजाति के लिए कुल 143, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 198, आर्थिक रुप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए कुल 77 पद आरक्षित किए गए थे। इसमें अनुसूचित जाति वर्ग के लिए शून्य पद दर्शाए गए थे, वहीं अब वन विभाग ने कहा है कि वन रक्षक की सीधी भर्ती परीक्षा (2026) के लिए विज्ञापित पदों की गणना में त्रुटि हो गई थी। अब श्रेणीवार और प्रवर्गवार सुधार कर संशोधित विज्ञापन जल्द जारी किया जाएगा।

वन सचिव और ECB को भेजा स्पष्टीकरण
वन रक्षक भर्ती परीक्षा 2026 के विज्ञापन में हुई त्रुटि को लेकर वन सचिव और कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) को भी पत्र भेजकर स्पष्टीकरण दिया गया है। वनरक्षक के 728 रिक्त पदों पर सीधी भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 14 मार्च 2026 निर्धारित की गई थी। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई थी कि वे समय रहते अपना पंजीकरण पूरा कर लें। नियमानुसार, उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं (10+2) उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। आवेदन शुल्क सामान्य वर्ग के लिए 500 रुपये प्रति प्रश्न पत्र रखा गया था। वहीं, मध्य प्रदेश के मूल निवासी अन्य वर्गों के अभ्यर्थियों के लिए शुल्क 250 रुपये निर्धारित किया गया थी। जिसमें अब नए विज्ञापन के जरिए जानकारी मिलेगी।

कर्मचारी चयन मंडल ने दी जानकारी
इस मामले को लेकर कर्मचारी चयन मंडल के अधिकारियों ने बताया कि भर्ती के पदों का रोस्टर और श्रेणीवार गणना संबंधित विभाग द्वारा भेजी जाती है, जबकि मंडल की भूमिका केवल परीक्षा आयोजित करने तक सीमित रहती है। इस मामले में बड़ा खुलासा यह हुआ है कि ECB ने पहले ही वन विभाग को त्रुटि के बारे में जानकारी दी थी, लेकिन विभाग ने उल्टा अपने आंकड़ों को सही बताया था, जिसके बाद अब पूरी तरह से वन विभाग पर सवाल उठ रहे हैं।

सम्बंधित ख़बरें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

लेटेस्ट