भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश बेटियों को बोझ नहीं समझा जाए, इसीलिये लाड़ली लक्ष्मी योजना की शुरुआत की गई थी, इसके बाद प्रदेश में बच्चियों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, लेकिन उसके बाद देखने में आया कि कई लाड़ली लक्ष्मियों ने बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़ दी, इस आंकड़े का असर यह हुआ कि उनको लाड़ली लक्ष्मी योजना का लाभ दिलाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं अब इस परेशानी को हल करने के लिए मोहन सरकार ने नई पहले की है, हन सरकार अब बीच में पढ़ाई छोड़ देने वाली बेटियों की पढ़ाई पूरी करवाने ये शुरुआत करने जा रही है।
‘सरस्वती योजना’ की शुरुआत
महिला बाल विकास विभाग की ‘सरस्वती योजना’ का मकसद उन ड्राप आउट बेटियों की पूरी पढ़ाई करवाना है, जिनकी किसी वजह से पढ़ाई माध्यमिक हाईस्कूल या हायर सेकेण्डरी स्तर पर छूट गई हो, वो बेटियां फिर से किताबों और क्लासरुम का रुख कर सकें, इसके जरिए उन बच्चियों के परिजन से संपर्क किया जाएगा, ताकि फिर से उनका स्कूल में दाखिला कराकर पढ़ाई को पूरा कराया जा सके, जिसके लिए निचले स्तर तक सरकारी तंत्र की मदद ली जाएगी।
महिला बाल विकास विभाग ने बनाया प्लान
बच्चियों को बेहतर सुविधा दिलाने के लिए महिला बाल विकास विभाग की इस योजना को इस तरह से प्लान किया गया है कि, ड्रॉप आउट छात्राएं राज्य ओपन स्कूल से दुबारा पढ़ाई शुरु कर सकें। इन बच्चियों को दोबारा पढ़ाई करने के लिए स्टडी मटेरियल के अलावा क्लासेस मेंटर्स की सुविधा भी दी जाएगी। प्रदेश भर में पहले ड्राप आउट लड़कियों का सर्वे कराएगा, जो बच्चियां पढाई पूरी कर लेंगी उन्हे बाकायदा सर्टिफिकेट दिया जाएगा, और इनरोल इन्हीं छात्राओं को आगे रोजगार के अवसर भी मुहैया कराने के प्रयास होंगे।
टॉयलेट भी बना बड़ी वजह
मध्यप्रदेश में बच्चियों के स्कूल छोड़ने की वजह उभरकर सामने आई है, बीते साल तक प्रदेश के 11 हजार से ज्यादा स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग से शौचालय नहीं था, जिसकी वजह से करीब साढ़े तीन लाख छात्राओं ने बीच में ही स्कूल छोड़ दिया। अब इस समस्या से निपटने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं, साथ ही जबलपुर हाईकोर्ट ने भी जनहित याचिका पर स्वत: संज्ञान लेते हुए स्कूलों की बदहाल स्थिति पर सरकार से जानकारी मांगी है।


