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Friday, April 17, 2026
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​नेशनल हाईवे निर्माण में बड़ी लापरवाही: शहपुरा बायपास पर बिना ‘बेस’ तैयार किए बिछाए जा रहे पाइप, बड़े हादसे का खतरा

डिंडोरी/ शैलेश नामदेव/ खबर डिजिटल/ ​शाहपुरा डिंडौरी जबलपुर-अमरकंटक नेशनल हाईवे के निर्माण कार्य में ठेकेदार द्वारा बरती जा रही गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। शहपुरा बायपास स्थित शारदा टेकरी के पास बन रहे एक पुल (कलवर्ट) के निर्माण में तकनीकी नियमों को ताक पर रखकर काम किया जा रहा है, जिससे भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका जताई जा रही है।

​निर्माण कार्य से जुड़े जानकारों और तकनीकी मानकों के अनुसार, किसी भी पुल या पाइप कलवर्ट के निर्माण से पहले जमीन को समतल कर एक मजबूत ‘बेस’ तैयार करना अनिवार्य होता है। इसके ऊपर पीसीसी “प्लेन सीमेंट कंक्रीट” की मोटी परत डाली जाती है ताकि पुल की संरचना को स्थिरता और मजबूती मिल सके।

​हैरानी की बात यह है कि शारदा टेकरी के पास निर्माणाधीन इस पुल में न तो मजबूत बेस तैयार किया गया और न ही पीसीसी की ढलाई की गई। सीधे कच्ची जमीन पर भारी-भरकम पाइप डालकर निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जा रहा है। यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है एक वीडियो में यह साफ देखा जा सकता है कि किस तरह तकनीकी नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं

​जानकारों का कहना है कि यदि पुल की नींव ही मजबूत नहीं होगी, तो मानसून के दौरान जब पानी का बहाव तेज होगा, तो पुल के धंसने या बहने का पूरा खतरा बना रहेगा। यह मार्ग क्षेत्र का मुख्य संपर्क मार्ग है, जहाँ से हर दिन सैकड़ों वाहन गुजरते हैं। ऐसे में निर्माण की यह गुणवत्ता यात्रियों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ है।

​इतने बड़े नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट में गुणवत्ता की निगरानी के लिए विभागीय इंजीनियर और अधिकारियों की पूरी टीम तैनात रहती है। इसके बावजूद पेटी ठेकेदार द्वारा इस तरह की खुली लापरवाही करना यह दर्शाता है कि या तो अधिकारियों की मिलीभगत है या फिर वे अपने काम के प्रति बेहद लापरवाह हैं। स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब तकनीकी नियमों का पालन नहीं हो रहा, तो जिम्मेदार अधिकारी आखिर कहाँ सो रहे हैं।

​इस मामले को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि ​तत्काल प्रभाव से निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए। ​नियमों की अनदेखी करने वाले ठेकेदार का भुगतान रोका जाए। ​लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
​अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में किसी बड़े हादसे का इंतजार करता है या समय रहते सुधार के कदम उठाता है।

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