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Friday, April 17, 2026
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डिंडौरी में ​सरकारी खजाने पर डाका: 3 इंजीनियरों ने मिलकर किया करोड़ो का खेल

डिंडौरी/ खबर डिजिटल/ शैलेश नामदेव/ सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही का एक सनसनीखेज मामला डिंडौरी जिले के ग्राम छिंदगांव से सामने आया है। यहाँ की लघु सिंचाई परियोजना में करोड़ों रुपये के वारे-न्यायरे होने की पुष्टि के बाद जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है।

डिंडौरी कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए तीन इंजीनियरों को निलंबित करने की चेतावनी के साथ कारण बताओ नोटिस थमाया है।

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​कागजों पर सिमटी परियोजना, जेबों में पहुंचा सरकारी पैसा

​छिंदगांव लघु सिंचाई परियोजना का उद्देश्य स्थानीय किसानों को सिंचाई की सुविधा प्रदान करना था, लेकिन यह योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती दिख रही है। संयुक्त जांच समिति की विस्तृत रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। सबसे गंभीर अनियमितता यह पाई गई कि धरातल पर परियोजना का कार्य अधूरा है, लेकिन दस्तावेजों में हेराफेरी कर 6.89 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि संबंधित ठेकेदारों या पक्षों को भुगतान कर दी गई।

​घटिया निर्माण की पोल खुली:

जांच दल ने पाया कि जो थोड़ा-बहुत निर्माण कार्य हुआ भी है, वह निर्धारित तकनीकी मानकों और गुणवत्ता के मापदंडों पर बिल्कुल खरा नहीं उतरता। ​डूब क्षेत्र में निर्माण का ‘अजीब’ फैसला: विभाग की दूरदर्शिता पर सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा हुआ जब जांच में पता चला कि परियोजना का ढांचा ऐसे क्षेत्र में बना दिया गया है, जो ‘संभावित डूब क्षेत्र’ में आता है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर यह चालू भी होती है, तो भी इसकी उपयोगिता संदिग्ध रहेगी।

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​तीन अधिकारियों पर गिरी गाज: 10 अप्रैल तक का अल्टीमेटम

​प्रशासनिक अनुशासनहीनता और मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के उल्लंघन के मामले में कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाते हुए निम्नलिखित अधिकारियों को दोषी माना है:

एस.के. शर्मा (कार्यपालन यंत्री): परियोजना की निगरानी में विफलता।
​नारायण देशमुख (अनुविभागीय अधिकारी): तकनीकी और प्रशासनिक तालमेल में कमी।
विहान शुक्ला (उपयंत्री): मौके पर कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित न करना।

​इन तीनों अधिकारियों को 10 अप्रैल 2026 तक अपनी सफाई पेश करने के लिए समय दिया गया है। कलेक्टर ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक उत्तर नहीं मिला, तो मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत उनके विरुद्ध कठोर दंडात्मक और एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी।

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​प्रशासन की चेतावनी: लापरवाही अब स्वीकार्य नहीं

​इस कार्रवाई के माध्यम से कलेक्टर भदौरिया ने जिले के समस्त विभागीय अधिकारियों को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

डिंडौरी कलेक्टर, अंजू पवन भदौरिया का कहना

​सरकारी धन जनता की अमानत है और इसका एक-एक पैसा जनकल्याण में ही खर्च होना चाहिए। छिंदगांव जैसे प्रकरणों की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए जिले में अब एक सख्त निगरानी प्रणाली (Monitoring System) लागू की जा रही है।

​इस मामले के उजागर होने के बाद अब अन्य लंबित सिंचाई परियोजनाओं की भी बारीकी से जांच होने की संभावना बढ़ गई है, जिससे विभाग के भीतर हड़कंप मचा हुआ है।

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