मध्य प्रदेश में होने वाले आगामी नगरीय निकाय चुनावों को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं. State Election Commission Madhya Pradesh इस प्रक्रिया को लेकर सक्रिय हो चुका है और इसी बीच चुनाव से जुड़े नियमों में संभावित बदलाव की चर्चा ने सियासी माहौल गर्म कर दिया है. बताया जा रहा है कि वर्ष 2027 में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव लड़ना पहले की तुलना में ज्यादा महंगा पड़ सकता है. इसकी वजह उम्मीदवारों की जमानत राशि में प्रस्तावित बढ़ोतरी है, जिसे लेकर आयोग ने सरकार को सुझाव भेज दिया है.
कितने हैं नगर निकाय
अगर चुनाव के पैमाने पर नजर डालें तो यह प्रक्रिया काफी व्यापक है. प्रदेश में कुल 413 नगरीय निकाय हैं, जिनमें 16 नगर निगम, 99 नगर पालिका और 298 नगर परिषद शामिल हैं. इसके अलावा 7679 वार्डों में चुनाव होना है. इतने बड़े स्तर पर चुनाव होने के कारण उम्मीदवारों की संख्या भी काफी ज्यादा रहने की संभावना है और अनुमान लगाया जा रहा है कि करीब एक लाख लोग चुनाव मैदान में उतर सकते हैं. ऐसे में जमानत राशि में बदलाव को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
जमानत राशियां बढ़ेगी
प्रस्ताव के अनुसार अलग-अलग पदों के लिए जमानत राशि बढ़ाने की योजना है. नगर निगम महापौर के लिए वर्तमान 20 हजार रुपये की जगह इसे बढ़ाकर करीब 32 हजार रुपये किया जा सकता है. नगर पालिका अध्यक्ष के लिए 15 हजार से बढ़ाकर लगभग 24 हजार रुपये और नगर परिषद अध्यक्ष के लिए 10 हजार से बढ़ाकर करीब 16 हजार रुपये किए जाने की चर्चा है. इसी तरह पार्षद पदों के लिए भी राशि में बढ़ोतरी का प्रस्ताव है, जहां नगर निगम पार्षद के लिए 5 हजार से 8 हजार, नगर पालिका पार्षद के लिए 3 हजार से 4800 और नगर परिषद पार्षद के लिए भी राशि बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है.
इस बदलाव को लागू करने के लिए नियमों में संशोधन जरूरी होगा. इसके तहत मध्य प्रदेश नगरपालिका निर्वाचन नियम 1994 के नियम 26 में बदलाव किया जाएगा. हालांकि यह संशोधन तभी लागू होगा जब नगरीय विकास एवं आवास विभाग इसकी मंजूरी देगा. जमानत राशि से जुड़े नियम भी पहले जैसे ही रहेंगे. यदि कोई उम्मीदवार कुल वैध मतों का 6 प्रतिशत से कम वोट हासिल करता है, तो उसकी जमानत राशि जब्त कर ली जाती है. वहीं अगर उसे 6 प्रतिशत या उससे अधिक वोट मिलते हैं, तो यह राशि वापस कर दी जाती है. चुनावी प्रक्रिया में एक और बड़ा बदलाव सामने आ सकता है. पिछली बार जहां महापौर का चुनाव सीधे जनता द्वारा किया गया था, वहीं नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्षों का चयन अप्रत्यक्ष तरीके से हुआ था. इस बार संभावना जताई जा रही है कि सभी प्रमुख पदों के लिए प्रत्यक्ष चुनाव कराए जाएंगे, यानी मतदाता सीधे अपने प्रतिनिधि का चयन करेंगे.
इस प्रस्तावित बदलाव का असर चुनावी परिदृश्य पर भी देखने को मिल सकता है. जमानत राशि बढ़ने से चुनाव लड़ना थोड़ा महंगा हो जाएगा, जिससे केवल गंभीर और तैयार उम्मीदवार ही मैदान में उतरेंगे. इससे गैर-गंभीर प्रत्याशियों की संख्या कम हो सकती है और चुनाव अधिक व्यवस्थित और प्रतिस्पर्धी बन सकता है. कुल मिलाकर यह बदलाव चुनाव प्रक्रिया को ज्यादा प्रभावी और संतुलित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
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