मध्य प्रदेश में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए निर्वाचन खर्च का हिसाब देना अनिवार्य होता है. नियमों के अनुसार हर अभ्यर्थी को चुनाव परिणाम घोषित होने के 30 दिनों के भीतर अपने चुनावी खर्च का पूरा ब्योरा जमा करना पड़ता है. जो उम्मीदवार तय समय सीमा में यह जानकारी नहीं देते, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है और उन्हें चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य भी घोषित किया जा सकता है.
एमपी नगरीय निकाय चुनाव
राज्य निर्वाचन आयोग अब ऐसे लंबित मामलों के तेजी से निपटारे में जुट गया है. इसी उद्देश्य से आयोग ने ऑनलाइन सुनवाई की नई व्यवस्था शुरू की है. इस डिजिटल प्रक्रिया के जरिए अब तक करीब 3500 मामलों का निपटारा किया जा चुका है और संबंधित अभ्यर्थियों को अयोग्य घोषित किया गया है.
आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए यह प्रक्रिया तेज
आयोग ने आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए यह प्रक्रिया तेज की है. अक्टूबर और नवंबर 2026 में प्रस्तावित उपचुनावों के साथ 2027 में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव होने हैं. इससे पहले आयोग उन उम्मीदवारों के मामलों को अंतिम रूप देना चाहता है जिन्होंने 2022 के चुनाव के बाद अब तक निर्वाचन व्यय का विवरण जमा नहीं किया है.
NIC के माध्यम से ऑनलाइन सुनवाई की व्यवस्था लागू
इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए उम्मीदवारों को भोपाल स्थित आयोग कार्यालय आने की जरूरत नहीं होगी. राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज श्रीवास्तव ने राष्ट्रीय सूचना केंद्र यानी NIC के माध्यम से ऑनलाइन सुनवाई की व्यवस्था लागू की है. उम्मीदवार अपने जिला मुख्यालय से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपना पक्ष रख सकते हैं.
प्रत्येक गुरुवार को इन मामलों की सुनवाई के लिए विशेष समय निर्धारित किया गया है. आयोग के अनुसार अब तक हजारों मामलों में फैसला सुनाया जा चुका है. इनमें कुछ अभ्यर्थियों को दो साल और कुछ को पांच साल तक चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया गया है. ऐसे उम्मीदवार अब 2027 में होने वाले पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकेंगे. राज्य निर्वाचन आयोग का मानना है कि ऑनलाइन व्यवस्था से मामलों के निपटारे में तेजी आई है और पारदर्शिता भी बढ़ी है. साथ ही उम्मीदवारों को भी अपने जिले से ही सुनवाई में शामिल होने की सुविधा मिल रही है.
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