Tuesday, November 3, 2026
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इंदौर बीजेपी में बढ़ी अंदरूनी कलह, महिला मोर्चा अध्यक्ष पद पर घमासान

मध्य प्रदेश के इंदौर में भाजपा संगठन के भीतर इन दिनों मोर्चा और प्रकोष्ठों की नियुक्तियों को लेकर हलचल तेज हो गई है. भाजयुमो के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा महिला मोर्चा अध्यक्ष पद को लेकर हो रही है. इस पद के लिए युवा और वरिष्ठ महिला नेताओं के बीच अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आने लगी है. पार्टी संगठन चाहता है कि सभी जिला इकाइयां जल्द से जल्द नामों का पैनल तैयार कर प्रदेश नेतृत्व को भेजें, ताकि नियुक्तियों की प्रक्रिया पूरी की जा सके. इसी सिलसिले में नगर भाजपा अध्यक्ष सुमित मिश्रा लगातार वरिष्ठ नेताओं और कोर कमेटी के सदस्यों से चर्चा कर रहे हैं. महिला मोर्चा की नियुक्तियों को लेकर इस बार दावेदारों की संख्या काफी ज्यादा बताई जा रही है. यही वजह है कि कई बड़े नेता किसी एक नाम का खुलकर समर्थन करने से बच रहे हैं. नेताओं को डर है कि अगर किसी एक चेहरे के पक्ष में खुलकर सामने आए तो बाकी दावेदार नाराज हो सकते हैं. ऐसे में कई वरिष्ठ नेता फिलहाल तटस्थ भूमिका में दिखाई दे रहे हैं.

महिला मोर्चा के भीतर दो अलग-अलग विचारधाराएं

दरअसल महिला मोर्चा के भीतर दो अलग-अलग विचारधाराएं बन गई हैं. एक तरफ युवा नेत्रियां हैं, जो संगठन में नई पीढ़ी को मौका देने की मांग कर रही हैं. उनका कहना है कि लंबे समय से एक ही तरह के चेहरे पदों पर बने हुए हैं और अब संगठन को नई सोच और नई ऊर्जा की जरूरत है. युवा नेताओं का दावा है कि वे सोशल मीडिया से लेकर बूथ स्तर तक सक्रिय रूप से काम कर रही हैं और संगठन को मजबूत बनाने में बेहतर भूमिका निभा सकती हैं. वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ महिला नेताओं का मानना है कि महिला मोर्चा जैसे महत्वपूर्ण संगठनात्मक मंच को संभालने के लिए अनुभव बेहद जरूरी है. उनका कहना है कि राजनीतिक संतुलन, कार्यक्रमों का संचालन और संगठन की जिम्मेदारियां अनुभवी नेताओं के हाथ में ही बेहतर तरीके से निभाई जा सकती हैं. इसी मतभेद के चलते अब तक महिला मोर्चा की अंतिम सूची तैयार नहीं हो सकी है.

इसने कर दिया है खुद को अलग

राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि इंदौर की पूर्व सांसद और पूर्व लोकसभा स्पीकर Sumitra Mahajan ने इस बार खुद को पूरी प्रक्रिया से लगभग अलग कर लिया है. पिछले कई वर्षों से महिला मोर्चा अध्यक्ष के चयन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती थी. बताया जा रहा है कि उन्होंने कुछ नाम सुझाए भी थे, लेकिन उन पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया. इसके बाद उन्होंने सक्रिय हस्तक्षेप कम कर दिया. उधर इंदौर सांसद Shankar Lalwani अपनी समर्थक और पार्षद संध्या यादव के नाम को आगे बढ़ाने की कोशिश में बताए जा रहे हैं. अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि भाजपा संगठन युवा नेतृत्व को प्राथमिकता देता है या फिर अनुभवी चेहरों पर भरोसा कायम रखता है.

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