अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर अब देशभर में साफ दिखाई देने लगा है. पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से आम लोगों की जेब पर बोझ बढ़ रहा है. इसी बीच केंद्र सरकार ने राहत देने के उद्देश्य से पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली केंद्रीय उत्पाद शुल्क यानी एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती करने का फैसला लिया है. इस फैसले के बाद पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपये प्रति लीटर रह गई है, जबकि डीजल पर यह पूरी तरह समाप्त हो गई है. केंद्र के इस कदम के बाद अब राज्यों पर भी वैट और अन्य टैक्स कम करने का दबाव बढ़ने लगा है.
अन्य राज्यों के मुकाबले एमपी में ज्यादा पेट्रोल-डीजल के दाम
मध्य प्रदेश उन राज्यों में शामिल है जहां पेट्रोल और डीजल की कीमतें देश में सबसे अधिक मानी जा रही हैं. वर्तमान में प्रदेश में पेट्रोल की औसत कीमत करीब 111.69 रुपये प्रति लीटर बताई जा रही है, जबकि डीजल लगभग 95.82 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. ईंधन की ऊंची कीमतों के पीछे राज्य सरकार द्वारा लगाए जाने वाले भारी टैक्स को बड़ा कारण माना जा रहा है.
यहां जानें आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024-25 के दौरान पेट्रोल और डीजल से मध्य प्रदेश सरकार को करीब 15,329.4 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ. यही वजह है कि राज्य सरकार के लिए टैक्स कम करना आर्थिक रूप से आसान फैसला नहीं माना जा रहा. हालांकि केंद्र द्वारा एक्साइज ड्यूटी घटाने के बाद जनता की उम्मीदें अब राज्य सरकार पर टिक गई हैं.
इतना लगाया जाता है वैट
पेट्रोल प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में पेट्रोल पर 29 प्रतिशत वैट लगाया जाता है. इसके अलावा प्रति लीटर 2.50 रुपये का फिक्स टैक्स और 1 प्रतिशत सेस भी लिया जाता है. वहीं डीजल पर 19 प्रतिशत वैट, 1.50 रुपये प्रति लीटर फिक्स टैक्स और 1 प्रतिशत सेस वसूला जाता है. यही कारण है कि प्रदेश में ईंधन की कीमतें कई अन्य राज्यों की तुलना में अधिक बनी हुई हैं.
टैक्स घटाने की मांग
अगर दूसरे राज्यों से तुलना करें तो राजस्थान में पेट्रोल पर 29.04 प्रतिशत वैट के साथ रोड डेवलपमेंट सेस भी लिया जाता है. छत्तीसगढ़ में पेट्रोल पर 24 प्रतिशत वैट लागू है, जबकि उत्तर प्रदेश में टैक्स की दरें मध्य प्रदेश से कम हैं. गुजरात में तो पेट्रोल और डीजल पर अपेक्षाकृत काफी कम वैट लगाया जा रहा है, जिसके कारण वहां ईंधन की कीमतें कम देखने को मिलती हैं. हालांकि फिलहाल मध्य प्रदेश सरकार की ओर से टैक्स घटाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अभी तक वाणिज्यिक कर विभाग से ऐसा कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है. लेकिन जिस तरह से केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है, उसके बाद आने वाले दिनों में राज्य सरकार पर भी राहत देने का दबाव और बढ़ सकता है.
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