Tuesday, November 3, 2026
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Jyotiraditya Scindia: सिंधिया कांग्रेस में आए तो मैं पार्टी छोड़ दूंगा… दिग्गज नेता के तीखे बोल

मध्यप्रदेश कांग्रेस में पुराने राजनीतिक विवाद एक बार फिर खुलकर सामने आते दिखाई दिए. इंदौर के गांधी भवन में आयोजित कार्यकर्ता संवाद कार्यक्रम के दौरान पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजेय सिंह राहुल ने ऐसा बयान दिया जिसने प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ा दी. उनके बयान को कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी नाराजगी और पुराने मतभेदों से जोड़कर देखा जा रहा है. कार्यक्रम में जब कार्यकर्ताओं ने सवाल किया कि भविष्य में अगर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती है तो क्या पार्टी छोड़कर जाने वाले नेताओं की वापसी हो सकती है, तब अजय सिंह ने बिना किसी हिचक के जवाब दिया. उन्होंने साफ कहा कि सत्ता में आने के बाद कांग्रेस को ऐसे नेताओं की जरूरत नहीं पड़ेगी जिन्होंने मुश्किल समय में पार्टी छोड़ी थी. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी परिस्थितियों को देखते हुए कुछ मामलों में फैसला अलग हो सकता है.

ज्योतिरादित्य सिंधिया की वापसी को लेकर चर्चा तेज

मामला उस समय और ज्यादा चर्चा में आ गया जब बातचीत का केंद्र सीधे केंद्रीय मंत्री Jyotiraditya Scindia की संभावित वापसी पर पहुंच गया. इस सवाल पर अजय सिंह ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अगर सिंधिया दोबारा कांग्रेस में लौटते हैं तो वे इसका समर्थन नहीं करेंगे. उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर पार्टी उन्हें वापस लेती है तो वे खुद कांग्रेस छोड़ने पर विचार करेंगे. उनके इस बयान का मंच पर मौजूद कांग्रेस नेता के के मिश्रा ने भी समर्थन किया. इसके बाद कार्यक्रम केवल कार्यकर्ता संवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक संकेतों और अंदरूनी संदेशों का बड़ा मंच बन गया.

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था

दरअसल मार्च 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था. उनके साथ कई विधायकों ने भी पार्टी छोड़ी, जिसके बाद तत्कालीन Kamal Nath सरकार अल्पमत में आ गई और प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हो गया. उस घटनाक्रम को कांग्रेस आज भी अपने सबसे बड़े राजनीतिक झटकों में गिनती है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अजय सिंह राहुल का यह बयान केवल व्यक्तिगत नाराजगी नहीं है, बल्कि कांग्रेस के उस वर्ग की सोच को दर्शाता है जो 2020 की टूट को अब तक भुला नहीं पाया है. अब देखने वाली बात यह होगी कि यह बयान सिर्फ मंच तक सीमित रहता है या आने वाले दिनों में कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में नई बहस और खींचतान को जन्म देता है.

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