भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के राज्यसभा जाने की अटकलें एक बार फिर तेज हो गई हैं। नई दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से उनकी मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों की चर्चा शुरू हो गई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस नेतृत्व कई विकल्पों पर विचार कर रहा है और कमलनाथ का नाम मजबूत दावेदारों में देखा जा रहा है।
कांग्रेस के लिए सुरक्षित विकल्प माने जा रहे कमलनाथ
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दिग्विजय सिंह के बाद कमलनाथ कांग्रेस के उन वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं, जिनके नाम पर पार्टी के भीतर व्यापक सहमति बन सकती है। प्रदेश कांग्रेस के कुछ पदाधिकारियों का दावा है कि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं को लेकर क्रॉस-वोटिंग की संभावना कम मानी जाती है।

राज्यसभा की एक सीट के लिए चाहिए 58 वोट
मध्यप्रदेश से राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है। फिलहाल कांग्रेस के पास 61 विधायक हैं, यानी जरूरी आंकड़े से केवल तीन वोट अधिक हैं। ऐसी स्थिति में पार्टी के लिए उम्मीदवार चयन काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कांग्रेस के सामने क्रॉस-वोटिंग की चुनौती
इसी साल अन्य राज्यों के राज्यसभा चुनावों में कांग्रेस को क्रॉस-वोटिंग का सामना करना पड़ा था। हरियाणा और ओडिशा में हुए चुनावों ने पार्टी के लिए रणनीतिक चुनौतियां खड़ी की थीं। ऐसे में कांग्रेस इस बार उम्मीदवार चयन को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत सकती है।
बीजेपी भी बना रही रणनीति
मध्यप्रदेश विधानसभा में बीजेपी के पास 165 विधायक हैं। मौजूदा संख्या के आधार पर पार्टी की दो सीटों पर जीत लगभग तय मानी जा रही है। इसके बाद भी बीजेपी के पास अतिरिक्त वोट बचते हैं, जिसके चलते राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि यदि कांग्रेस में किसी तरह की अंदरूनी खींचतान सामने आती है तो बीजेपी तीसरी सीट पर मुकाबले की रणनीति बना सकती है।
सूत्रों के मुताबिक पार्टी स्तर पर डमी उम्मीदवार उतारने जैसे विकल्पों पर भी चर्चा होने की बात कही जा रही है।
आधिकारिक घोषणा का इंतजार
हालांकि अब तक कांग्रेस की ओर से कमलनाथ के राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन खड़गे से मुलाकात के बाद राजनीतिक चर्चाएं और अटकलें तेज हो गई हैं।
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