राजधानी भोपाल में इस महीने कई बिजली उपभोक्ताओं को उम्मीद से अधिक बिल मिलने के बाद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. बिजली बिलों में सुरक्षा निधि समायोजन जोड़े जाने से कई उपभोक्ताओं के बिल करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं. बिजली वितरण कंपनी हर वर्ष जून, जुलाई और अगस्त की खपत वाले बिलों के दौरान सुरक्षा निधि का समायोजन करती है. इसी प्रक्रिया के तहत जून महीने में हुई बिजली खपत का बिल जुलाई में जारी किया गया है, जिससे बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है.
लाखों उपभोक्ताओं पर पड़ा असर
जानकारी के अनुसार भोपाल के करीब दो लाख बिजली उपभोक्ताओं के बिलों में सुरक्षा निधि समायोजन जोड़ा गया है. इसके जरिए बिजली कंपनी लगभग 80 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि वसूलने की तैयारी में है. यही वजह है कि इस बार कई घरों के बिजली बिल सामान्य से काफी अधिक आए हैं और उपभोक्ताओं में इसे लेकर नाराजगी भी देखने को मिल रही है.
स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को भी महसूस हुआ फर्क
महाबली नगर निवासी राजेश वर्मा ने बताया कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उन्हें हर महीने टाइम ऑफ डे (TOD) योजना के तहत करीब 40 यूनिट तक की छूट मिल जाती थी. लेकिन इस बार उन्हें केवल 25 यूनिट की ही राहत मिली. उनका कहना है कि रात के समय मिलने वाली रियायती दर का लाभ कम होने से बिजली बिल पहले की तुलना में अधिक आ गया.
सुरक्षा निधि से बढ़ा बिल
चूनाभट्टी निवासी अखिलेश भवनानी ने बताया कि पिछले महीने उनका बिजली बिल करीब 1800 रुपये था, जबकि इस बार यह बढ़कर 2500 रुपये से अधिक पहुंच गया. बिल में 400 रुपये सुरक्षा निधि समायोजन के नाम पर जोड़े गए हैं. इसी तरह सुभाष नगर निवासी विक्रम परिहार का मासिक बिल सामान्य रूप से करीब 1200 रुपये आता था, लेकिन इस बार उन्हें 1500 रुपये से अधिक का बिल मिला, जिसमें 250 रुपये सुरक्षा निधि के रूप में जोड़े गए हैं.
ऐसे कम कर सकते हैं बिजली बिल का असर
बिजली कंपनी के अनुसार यदि घर में स्मार्ट मीटर लगा है तो उपभोक्ताओं को उपाय ऐप के माध्यम से अपनी रियल टाइम बिजली खपत पर लगातार नजर रखनी चाहिए. कोशिश करें कि मासिक खपत 150 यूनिट के भीतर रहे, ताकि उपलब्ध छूट का पूरा लाभ मिल सके.
इसके अलावा दिन के समय सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे के बीच बिजली से जुड़े अधिकतर घरेलू काम पूरे करना फायदेमंद हो सकता है. अनावश्यक बिजली की खपत कम करने से बिल पर नियंत्रण रखा जा सकता है.
कैसे तय होती है सुरक्षा निधि
सुरक्षा निधि की राशि पूरे वर्ष की बिजली खपत के आधार पर तय की जाती है. इसके लिए 45 दिनों की औसत खपत का आकलन किया जाता है. यदि उपभोक्ता पूरे साल बिजली की खपत कम रखते हैं तो अगले वर्ष सुरक्षा निधि की राशि भी कम हो सकती है, जिससे भविष्य के बिजली बिलों में राहत मिलने की संभावना रहती है.
