भोपाल में मौसम के लगातार बदलते मिजाज का असर लोगों की सेहत पर भी दिखाई देने लगा है. इस समय वायरल संक्रमण के मरीज बढ़ रहे हैं, वहीं निमोनिया के मामलों में भी इजाफा देखा जा रहा है. डॉक्टरों के मुताबिक कुछ मरीजों में वायरल संक्रमण के बाद बैक्टीरियल इंफेक्शन भी हो रहा है, जिससे फेफड़ों पर दोहरा असर पड़ रहा है.
ऐसे मरीज अस्पतालों में तेज बुखार, खांसी, सांस लेने में परेशानी और ऑक्सीजन लेवल गिरने जैसी शिकायतों के साथ पहुंच रहे हैं. बुजुर्गों, बच्चों और पहले से अस्थमा, सीओपीडी, हृदय रोग या डायबिटीज जैसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों में इसका खतरा ज्यादा बताया जा रहा है.
रोजाना पहुंच रहे निमोनिया के मरीज
रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ रेस्पिरेटरी डिजीज यानी आरआइआरडी की ओपीडी में हर दिन करीब 4 से 5 मरीज निमोनिया की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं. संस्थान के अधीक्षक डॉ. लोकेन्द्र दवे के अनुसार, इनमें रोजाना 3 से 4 मरीज वायरल निमोनिया से प्रभावित मिल रहे हैं. कुछ मामलों में वायरल संक्रमण के साथ बैक्टीरियल इंफेक्शन भी पाया जा रहा है.
जेपी अस्पताल में भी रोजाना 2 से 3 निमोनिया के मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं.
दोनों फेफड़ों तक पहुंच सकता है संक्रमण
डॉक्टरों के मुताबिक बाइलेट्रल निमोनिया में दोनों फेफड़ों में संक्रमण के कारण सूजन और तरल पदार्थ जमा हो सकता है. इससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलने में परेशानी होती है. मरीजों में तेज बुखार, खांसी, बलगम, सीने में दर्द, सांस फूलना और कमजोरी जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं.
अगर ऑक्सीजन का स्तर लगातार कम हो रहा है, तो इसे गंभीर संकेत माना जाता है. खासतौर पर बुजुर्ग और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों को लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
सावधानी बरतना बेहद जरूरी
अस्थमा, सीओपीडी, हृदय रोग, डायबिटीज और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को इस मौसम में ज्यादा सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है. भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क का इस्तेमाल, हाथों की साफ-सफाई और धूम्रपान से दूरी बनाना मददगार हो सकता है. डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक लेना भी उचित नहीं है.
दो मरीजों में सामने आया संक्रमण
58 वर्षीय राजेंद्र को चार दिनों से बुखार और खांसी थी. इसके बाद सांस फूलने लगी, जिसके चलते वह अस्पताल पहुंचे. जांच के दौरान सीटी स्कैन में दोनों फेफड़ों में संक्रमण पाया गया.
इसी तरह जवाहर नगर की रहने वाली संगीता को बुखार के बाद खांसी और सांस लेने में परेशानी होने लगी. उनका ऑक्सीजन स्तर 92 फीसदी तक पहुंच गया. सीटी स्कैन में दोनों फेफड़ों में संक्रमण के पैच दिखाई दिए.
वायरल संक्रमण के बाद हो सकता है बैक्टीरियल निमोनिया
गांधी मेडिकल कॉलेज के सांस रोग विशेषज्ञ डॉ. निशांत श्रीवास्तव के अनुसार, वायरल संक्रमण के बाद फेफड़ों की रोगों से लड़ने की क्षमता कमजोर हो सकती है. ऐसे में बाद में होने वाले बैक्टीरियल संक्रमण को सेकंडरी बैक्टीरियल निमोनिया कहा जाता है. बुजुर्गों और पहले से फेफड़ों की बीमारी वाले मरीजों में यह स्थिति ज्यादा गंभीर रूप ले सकती है.
