भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सरकारी बंगलों के आवंटन को लेकर प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। बी-टाइप सरकारी आवासों में रह रहे तीन पूर्व मंत्रियों को अब बंगला खाली करने का नोटिस जारी किया गया है। इनमें पूर्व मंत्री प्रभुराम चौधरी, अरविंद भदौरिया और मीना सिंह के नाम शामिल हैं। नोटिस में उन्हें तत्काल सरकारी आवास खाली कर एस्टेट संपदा कार्यालय को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित समय में बंगला खाली नहीं करने पर मध्यप्रदेश लोक परिसर (बेदखली) अधिनियम, 1974 के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
मंत्री पद खत्म होते ही आवंटन निरस्त
जानकारी के मुताबिक, तीनों पूर्व मंत्रियों को मंत्री रहते हुए भोपाल में बी-टाइप बंगले आवंटित किए गए थे। अब मंत्री पद पर नहीं होने के कारण नियमों के तहत इन आवासों का आवंटन स्वतः समाप्त माना गया है। इसके बावजूद पूर्व मंत्री इन सरकारी बंगलों में रह रहे हैं।
दो वर्तमान में विधायक, एक पूर्व विधायक
प्रभुराम चौधरी वर्तमान में सांची से भाजपा विधायक हैं, जबकि मीना सिंह मानपुर (उमरिया) से विधायक हैं। अरविंद भदौरिया भी पूर्व मंत्री के तौर पर सरकारी आवास में रह रहे हैं। बताया जा रहा है कि तीनों को नोटिस जुलाई 2026 के अंतिम सप्ताह में जारी किए गए थे। हालांकि, नोटिस जारी होने के बाद भी अब तक इन बंगलों को खाली नहीं किया गया है।
बिना पात्रता रहने पर किराए की भी होगी वसूली
नोटिस में सिर्फ बंगला खाली कराने की बात नहीं कही गई है, बल्कि पात्रता खत्म होने के बाद सरकारी आवास में रहने की अवधि का किराया भी वसूलने की तैयारी है। संपदा के निष्कासन अधिकारी की ओर से जारी नोटिस में संबंधित अवधि के किराए की गणना कर उसकी वसूली किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। यानी पूर्व मंत्रियों को सरकारी आवास खाली करने के साथ ही उस अवधि का अतिरिक्त किराया भी चुकाना पड़ सकता है, जिस दौरान वे पात्रता समाप्त होने के बाद भी बंगलों में रहे।
नरोत्तम मिश्रा को 2028 तक फिर मिला सरकारी बंगला
इसी बीच पूर्व गृह मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा को लेकर अलग तस्वीर सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार ने नरोत्तम मिश्रा को 2028 तक के लिए सरकारी आवास का नए सिरे से आवंटन कर दिया है। बताया जा रहा है कि नरोत्तम मिश्रा ने इसके लिए पहले ही आवेदन किया था। नरोत्तम मिश्रा पूर्ववर्ती सरकार में गृह मंत्री रह चुके हैं और फिलहाल बी-20 सरकारी आवास में रह रहे हैं। वहीं, अरविंद भदौरिया बी-27, प्रभुराम चौधरी बी-25 में निवासरत बताए जा रहे हैं।
बी-टाइप बंगलों में विधायक भी
सरकारी आवास आवंटन नियमों के मुताबिक विधायकों को बी-टाइप बंगले आवंटित करने की पात्रता नहीं है। इसके बावजूद कई मौजूदा और पूर्व जनप्रतिनिधियों के बी-टाइप आवासों में रहने की जानकारी सामने आई है। वर्तमान में मीना वर्मा को 74 बंगले क्षेत्र में बी-18 आवास आवंटित बताया जा रहा है। इसके अलावा बालेंदु सिंह बी-23 और पूर्व सांसद प्रहलाद सिंह ठाकुर बी-29 में रह रहे हैं। राजमणी प्रतिभा बागरी के भी बी-टाइप सरकारी आवास में रहने की जानकारी है।
पिछले साल बदले गए थे सरकारी आवास के नियम
सरकारी बंगलों पर कब्जे को लेकर सरकार पहले ही नियमों को सख्त कर चुकी है। करीब दस महीने पहले कैबिनेट ने शासकीय आवास आवंटन नियम, 2000 में संशोधन किया था। इसके तहत पात्रता खत्म होने के बाद भी सरकारी आवास खाली नहीं करने वालों से सामान्य किराए की तुलना में 10 गुना तक किराया और परिस्थितियों के अनुसार 30 गुना तक पेनाल्टी वसूलने का प्रावधान किया गया है।
अधिकारियों को लेकर दिखाई थी सख्ती
दरअसल, राजधानी भोपाल में कई अधिकारी तबादला होने के बाद भी सरकारी आवास खाली नहीं करते थे। इसी तरह कई नेता चुनाव हारने या पद बदलने के बाद भी सरकारी बंगलों में बने रहते थे। इसके कारण पात्र अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को नए आवास आवंटित करने में परेशानी होती थी। इसी समस्या को देखते हुए सरकार ने नियमों में बदलाव कर कार्रवाई और वसूली का प्रावधान सख्त किया था।अब तीन पूर्व मंत्रियों को जारी हुए नोटिस को इसी सख्त व्यवस्था की कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित पूर्व मंत्री बंगले खाली करते हैं या प्रशासन को बेदखली की कार्रवाई करनी पड़ती है।
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