भोपाल, 26 सितम्बर 2025 – मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में सोयाबीन उत्पादक किसानों के हित में भावांतर योजना लागू की जा रही है, जिससे अन्नदाताओं को उनकी मेहनत का पूरा मूल्य मिलेगा। इस योजना के तहत किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और मंडी के विक्रय मूल्य के बीच का अंतर सीधे उनके बैंक खाते में भुगतान किया जाएगा।
10 अक्टूबर से प्रारंभ होगा पंजीयन
भावांतर योजना के लिए किसानों को ई-उपार्जन पोर्टल पर 10 अक्टूबर से 25 अक्टूबर 2025 तक पंजीयन कराना अनिवार्य होगा।
पंजीकृत कृषकों के रकबे का सत्यापन राजस्व विभाग द्वारा किया जाएगा।
योजना की अवधि 01 नवम्बर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक रहेगी।
किसानों के खातों में लाभ की राशि डीबीटी (Direct Benefit Transfer) से सीधे पहुंचाई जाएगी।
MSP पर मिलेगा पूरा लाभ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹5328 प्रति क्विंटल घोषित किया है। यदि किसी किसान का विक्रय मूल्य इससे कम होता है, तो अंतर की राशि सरकार द्वारा किसानों को दी जाएगी।
उदाहरण: यदि किसान को बाजार में 4600 रुपए/क्विंटल भाव मिलता है, तो MSP (5328) और मंडी भाव (4600) के बीच का अंतर यानी ₹728/क्विंटल की राशि सरकार सीधे किसान के खाते में जमा करेगी।
मुख्यमंत्री के प्रमुख निर्देश
किसी भी स्तर पर गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए।
किसानों को सही दाम और सीधा लाभ मिले, इसकी सतत मॉनिटरिंग हो।
कलेक्टर्स, कमिश्नर्स और कृषि विभाग के अधिकारी क्षेत्रवार दायित्व निभाएं।
योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, सोशल मीडिया का भी उपयोग हो।
योजना से जुड़े जनप्रतिनिधि
वीडियो कॉन्फ्रेंस में कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना, राज्य मंत्री गौतम टेटवाल, सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल, विधायक राजेन्द्र पांडे, आशीष शर्मा, हरदीप सिंह डंग, अरूण भीमावद समेत कई जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और मुख्यमंत्री को इस पहल के लिए धन्यवाद दिया।
योजना का लाभ
किसानों को मंडियों में उपज बेचने की स्वतंत्रता रहेगी।
MSP और विक्रय मूल्य का अंतर राज्य सरकार वहन करेगी।
प्रत्येक स्थिति में किसान का लाभ सुनिश्चित किया जाएगा।
अन्य कार्यक्रमों पर भी जोर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सेवा पखवाड़ा, स्वदेशी जागरण सप्ताह और जीएसटी उत्सव को सफल बनाने में जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को मिलकर कार्य करना होगा।


