मुंबई : प्रमुख कृषि-व्यवसाय कंपनी गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड ने महाराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ कृषि और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए महाराष्ट्र राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (MSRLM-UMED) के साथ एक रणनीतिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह साझेदारी संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित ‘अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026’ के लक्ष्यों के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका को सुदृढ़ करना और लैंगिक अंतर को कम करना है। तीन वर्षों की इस पहल के तहत स्वयं सहायता समूहों (SHG) और महिला किसानों को उन्नत कृषि प्रथाओं (GAP) और एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे उनकी आय और उत्पादकता में स्थायी सुधार हो सके।
कार्यक्रम के पहले चरण में महाराष्ट्र के नौ प्रमुख कपास उत्पादक जिलों—नागपुर, अमरावती, यवतमाल, वाशिम, परभणी, जलगांव, बीड, अकोला और नांदेड़ पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके माध्यम से 5,000 से अधिक महिला किसानों और लगभग 50,000 एकड़ कृषि भूमि को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। गोदरेज एग्रोवेट इस कार्यक्रम के वित्तपोषण और तकनीकी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालेगा, जबकि MSRLM-UMED अपने व्यापक ‘कृषि सखी’ नेटवर्क के माध्यम से किसानों को संगठित करने में सहयोग करेगा। आगामी तीन वर्षों में इस योजना का विस्तार राज्य भर के 5,000 से अधिक स्वयं सहायता समूहों तक किया जाएगा, जिसमें कपास के साथ-साथ मक्का जैसी अन्य फसलों को भी शामिल करने की योजना है।
MSRLM-UMED के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, श्री निलेश सागर (IAS) ने इस सहयोग को ग्रामीण महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए एक मील का पत्थर बताया। वहीं, गोदरेज एग्रोवेट के सीईओ एवं एमडी, सुनील कटारिया ने कहा कि भारतीय कृषि के परिवर्तन में महिला किसान केंद्र में हैं और उन्हें व्यावहारिक कृषि तकनीकें प्रदान करना कंपनी की प्राथमिकता है। क्रॉप प्रोटेक्शन बिज़नेस के सीईओ, राजवेलु एनके और कॉर्पोरेट अफेयर्स प्रमुख, राकेश स्वामी ने भी इस बात पर जोर दिया कि विज्ञान-आधारित दृष्टिकोण और उद्योग-सार्वजनिक भागीदारी के माध्यम से ग्रामीण समुदायों को मजबूत किया जा सकता है, जो भविष्य में एक दोहराने योग्य (replicable) मॉडल पेश करेगा।


