नई दिल्ली : भारत और जापान के बीच कौशल विकास और अंतरराष्ट्रीय कार्यबल गतिशीलता के संबंधों को नई ऊँचाई देते हुए, एनएसडीसी इंटरनेशनल (NSDCI) ने आज उन 39 भारतीय उम्मीदवारों के लिए एक भव्य विदाई समारोह आयोजित किया, जिन्होंने जापानी भाषा और सांस्कृतिक प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में युवाओं को जापान के विभिन्न प्रान्तों जैसे टोक्यो, इबाराकी और होक्काइडो में रोजगार के लिए रवाना किया गया। ये युवा मुख्य रूप से केयर-गिविंग (देखभाल), आतिथ्य (hospitality) और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं देंगे।
5 लाख कर्मियों के मानव संसाधन विनिमय का लक्ष्य समारोह के दौरान एमएसडीई की आर्थिक सलाहकार श्रीमती अर्चना मायाराम ने प्रधानमंत्री की पिछली जापान यात्रा का उल्लेख किया, जहाँ दोनों देशों ने अगले 5 वर्षों में 5,00,000 कर्मियों के मानव संसाधन विनिमय का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि ये युवा जापान में भारत के “सांस्कृतिक राजदूत” के रूप में कार्य करेंगे। एनएसडीसी इंटरनेशनल अब तक 400 से अधिक उम्मीदवारों को प्रशिक्षित कर चुका है, जिनमें से 185 पहले से ही जापान में कार्यरत हैं। यह कार्यक्रम विशेष रूप से समावेशी है, जिसमें मणिपुर, मिजोरम, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे विभिन्न राज्यों के युवा शामिल हैं।
9 महीने का गहन प्रशिक्षण और वैश्विक अवसर एनएससी (NSDC) के सीईओ श्री अरुणकुमार पिल्लई ने बताया कि वर्तमान बैच ने नौ महीने का कड़ा भाषाई और सांस्कृतिक प्रशिक्षण प्राप्त किया है, ताकि वे जापानी कार्यस्थल की बारीकियों को समझ सकें। उन्होंने जोर देकर कहा कि कुशल कार्यबल की गतिशीलता अब अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक निर्णायक स्तंभ बन गई है। वर्तमान में 100 से अधिक अन्य उम्मीदवारों को भी जापान भेजने की तैयारी चल रही है। यह पहल न केवल भारतीय युवाओं को वैश्विक मंच प्रदान कर रही है, बल्कि भारत को “दुनिया के कौशल केंद्र” (Skill Capital of the World) के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।


