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टाटा पावर ने 1125 मेगावॉट दोरजिलुंग हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को लागू करने के लिए ड्रूक ग्रीन पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के साथ साईन किया कमर्शियल एग्रीमेन्ट

नेशनल : भारत की सबसे बड़ी एकीकृत विद्युत कंपनियों में से एक टाटा पावर कंपनी लिमिटेड ने 1125 मेगावॉट के दोरजिलुंग हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को लागू करने के लिए ड्रूक ग्रीन पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (डीजीपीसी) के साथ एक कमर्शियल एग्रीमेन्ट पर हस्ताक्षर किए हैं।

यह परियोजना भूटान के मोंगर स्थित कुरिच्चु नदी पर एक रन-ऑफ-द-रिवर प्रोजेक्ट के रूप में विकसित की जाएगी।

🤝 परियोजना की संरचना और निवेश

विवरणजानकारी
परियोजना का नाम1125 मेगावॉट दोरजिलुंग हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट
इक्विटी हिस्सेदारी (एसपीवी)डीजीपीसी: 60%, टाटा पावर: 40%
टाटा पावर का इक्विटी निवेशकिश्तों में लगभग ₹1572 करोड़ की प्रतिबद्धता।
कुल लागत₹13,100 करोड़
क्षमता187.5 मेगावॉट की छह यूनिट्स।
उत्पादन की शुरुआतसितंबर 2031 तक होने की उम्मीद।

🌍 रणनीतिक महत्व और प्रभाव

दोरजिलुंग प्रोजेक्ट भूटान की दूसरी सबसे बड़ी हाइड्रोपावर परियोजना होगी और देश में अब तक की सबसे बड़ी सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) की हाइड्रो परियोजना होगी।

  • ऊर्जा आपूर्ति: उम्मीद है कि इस परियोजना से होने वाले उत्पादन का 80 फीसदी हिस्सा भारत को निर्यात किया जाएगा, जिससे क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ विद्युत की उपलब्धता को बढ़ावा मिलेगा।
  • भूटान के लिए महत्व: इसे भूटान की घरेलू ऊर्जा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किया गया है, साथ ही यह इसकी अतिरिक्त स्वच्छ विद्युत को भारत को निर्यात करेगा, जिससे भूटान की ऊर्जा सुरक्षा एंव विकास प्राथमिकताओं को समर्थन मिलेगा।
  • अंतर्राष्ट्रीय समर्थन: इस परियोजना को वर्ल्ड बैंक का समर्थन प्राप्त है, जो इसे सीमा-पार स्वच्छ ऊर्जा फाइनैंसिंग में एक बड़ी उपलब्धि बनाता है।

🤝 इंडो-भूटान सहयोग का विस्तार

यह साझेदारी टाटा पावर और डीजीपीसी के बीच दशकों के ऊर्जा समझौते पर आधारित है।

परियोजना का नामटाटा पावर की हिस्सेदारीवर्तमान स्थिति
दोरजिलुंग40%कमर्शियल एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर
डागाचु हाइड्रो पावर26%सफलतापूर्वक संचालित
खोरलोचु हाइड्रो पावर40%कार्यान्वयन का काम जारी

ये परियोजनाएं एक साथ मिलकर भूटान में 5000 मेगावॉट स्वच्छ ऊर्जा क्षमता विकसित करने की दोनों कंपनियों की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं, जो भारत के शुद्ध-शून्य महत्वाकांक्षाओं के अनुरूप हैं।

डॉ. प्रवीर सिन्हा, सीईओ एवं मैनेजिंग डायरेक्टर, टाटा पावर ने कहा, “यह साझेदारी हमारे हाइड्रो पावर पोर्टफोलियो को सशक्त बनाएगी तथा इंडो-भूटान एनर्जी कॉरीडोर को सीमा पार हरित ऊर्जा सहयोग एवं एक दूसरे के लिए उपयोगी अग्रणी मॉडल के रूप में स्थापित करेगी।”

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