भारत के अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करते हुए टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड (TPREL) ने तमिलनाडु के करूर में 198 मेगावाट की एक विशाल पवन ऊर्जा परियोजना को सफलतापूर्वक चालू कर दिया है। ‘ग्रुप कैप्टिव मॉडल’ के तहत विकसित यह परियोजना टाटा स्टील की डीकार्बोनाइजेशन यात्रा में एक मील का पत्थर साबित होगी। यह परियोजना विशेष रूप से टाटा स्टील के औद्योगिक संचालन के लिए प्रति वर्ष 31 मिलियन यूनिट स्वच्छ ऊर्जा की आपूर्ति करेगी, जिससे सालाना लगभग 26,350 टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलेगी।
इस परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धि इसका रिकॉर्ड समय में पूरा होना और TPREL की ‘सेल्फ-ईपीसी’ (Self-EPC) कार्यप्रणाली है। कंपनी ने बाहरी ओईएम (OEM) पर निर्भर रहने के बजाय इंजीनियरिंग, निर्माण और ट्रांसमिशन लाइनों सहित सभी महत्वपूर्ण कार्यों का प्रबंधन स्वयं अपनी इन-हाउस टीम के माध्यम से किया है। दुर्गम और कठोर चट्टानी इलाकों जैसी भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद, टीम ने उन्नत मशीनरी का उपयोग कर मात्र 126 दिनों में फाउंडेशन का कार्य और 167 दिनों में टर्बाइन इंस्टॉलेशन पूरा कर उद्योग में एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है।
वर्तमान में TPREL का कुल अक्षय ऊर्जा पोर्टफोलियो 15.7 गीगावाट (GW) तक पहुँच गया है, जिसमें से 6.9 गीगावाट स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त हो रहा है। कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2045 तक शत-प्रतिशत स्वच्छ ऊर्जा प्राप्त करना है। करूर परियोजना के चालू होने के साथ ही टाटा पावर ने न केवल अपनी इंजीनियरिंग उत्कृष्टता को सिद्ध किया है, बल्कि भारत के हरित ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने और बड़े उद्योगों को टिकाऊ ऊर्जा समाधान प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता को भी और मजबूत किया है।


