नई दिल्ली : वैश्विक वित्त और लेखा निकाय, एसोसिएशन ऑफ चार्टर्ड सर्टिफाइड अकाउंटेंट्स (ACCA) द्वारा जारी नई रिपोर्ट ‘करियर पाथ्स रीइमैजिन्ड’ ने भारतीय वित्त क्षेत्र के भविष्य की एक नई तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, एक ही कंपनी या भूमिका में सीधे ऊपर बढ़ने वाला ‘लीनियर करियर’ (linear career) का पारंपरिक मॉडल अब समाप्त हो रहा है। भारत के लगभग 47% वित्त पेशेवरों का मानना है कि 2035 तक लचीले और विविध करियर पथ पूरी तरह से पारंपरिक भूमिकाओं की जगह ले लेंगे।
पद के बजाय कौशल पर आधारित होगी प्रगति वैश्विक स्तर पर 2,600 सदस्यों और 145 नियोक्ताओं के बीच किए गए इस शोध से पता चलता है कि भविष्य में करियर की प्रगति ‘डेजिग्नेशन’ या पद के बजाय ‘कौशल’ (Skills) के आधार पर मापी जाएगी। रिपोर्ट में ‘करियर लैडर’ (सीढ़ी) के बजाय ‘करियर लैटिस’ (जालीनुमा ढांचा) की ओर झुकाव देखा गया है, जहाँ पेशेवर अपनी विशेषज्ञता बढ़ाने के लिए विभिन्न विभागों और भूमिकाओं में横向 (lateral) रूप से भी आगे बढ़ सकते हैं।
AI और तकनीक: भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत तकनीकी बदलावों के प्रति भारतीय पेशेवरों का दृष्टिकोण काफी सकारात्मक और स्पष्ट है। लगभग 74% वित्त पेशेवरों ने AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और नवीनतम तकनीक को भविष्य के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण कौशल माना है। रिपोर्ट के अनुसार, तकनीकी चपलता (agility) अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि सफलता के लिए एक अनिवार्य शर्त बन गई है।
‘माइक्रो-रिटायरमेंट’ और बदलती जीवनशैली रिपोर्ट में एक और दिलचस्प रुझान सामने आया है—‘माइक्रो-रिटायरमेंट’। लंबी कार्य अवधि की तैयारी के बीच, पेशेवर अब काम के दौरान जानबूझकर छोटे ब्रेक या अंतराल ले रहे हैं ताकि वे खुद को फिर से तैयार (upskill) कर सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे कॉर्पोरेट ढांचे अधिक सपाट (flat) हो रहे हैं, पेशेवरों के लिए ‘जिज्ञासा’ और ‘निरंतर सीखने की प्रवृत्ति’ ही सफलता के सबसे मजबूत स्तंभ साबित होंगे।


