नंद घर रोज़ाना 4 लाख से अधिक बच्चों और 3 लाख महिलाओं के जीवन में परिवर्तन ला रहा है।
राष्ट्रीय: वेदांता समूह की सामाजिक प्रभाव इकाई, अनिल अग्रवाल फाउंडेशन (AAF) की प्रमुख सामाजिक पहल नंद घर ने भारत की सामाजिक विकास यात्रा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि की घोषणा की है। इस पहल के तहत 16 राज्यों में 10,000 से अधिक केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं, जो प्रतिदिन देशभर में 4 लाख से अधिक बच्चों और 3 लाख महिलाओं के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहे हैं।
नंद घर भारत सरकार की एकीकृत बाल विकास योजना (ICDS), जो इस वर्ष 50 वर्ष पूरे कर रही है, के अनुरूप पारंपरिक आंगनवाड़ियों को आधुनिक, तकनीक-सक्षम, प्रभावी केंद्रों में बदल रहा है।
नंद घर परिवर्तन का मॉडल
हर नंद घर एक परिवर्तन का मॉडल है, जो बच्चों और महिलाओं को बेहतर सुविधाएँ प्रदान करता है:
- बुनियादी ढाँचा: स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लर्निंग उपकरण, BaLA डिज़ाइन, विश्वसनीय बिजली, स्वच्छ पेयजल, साफ-सुथरे शौचालय, और बच्चों के अनुकूल फर्नीचर।
- प्रारंभिक शिक्षा: 3–6 वर्ष के बच्चों के लिए सुरक्षित, समावेशी और प्रेरणादायक स्थान, क्षेत्रीय भाषाओं में डिजिटल शिक्षण मॉड्यूल के साथ।
- पोषण और स्वास्थ्य: गरम भोजन, पोषण पूरक (अब तक 80 लाख से अधिक वितरित), स्वास्थ्य जांच, और टीकाकरण अभियान (90 लाख से अधिक लोगों तक पहुँच)।
- महिला सशक्तिकरण: प्राथमिक ट्रेडों में कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से हज़ारों महिलाएं प्रति माह ₹10,000 तक कमा रही हैं, जिससे उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता मिली है।
नेतृत्व के वक्तव्य और भविष्य का लक्ष्य
वेदांता के चेयरमैन श्री अनिल अग्रवाल ने इस उपलब्धि पर कहा:
“आज 16 राज्यों में 10,000 नंद घर पूरे करते हुए, यह सपना सच होता दिख रहा है। हर नंद घर सशक्तिकरण, शिक्षा और उम्मीद का प्रतीक है। यह उपलब्धि भारत सरकार, राज्य सरकारों और स्थानीय समुदायों के मजबूत सहयोग से ही संभव हुई है। हम 8 करोड़ बच्चों और 2 करोड़ महिलाओं के जीवन में बदलाव लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।”
भविष्य के लक्ष्य
- नंद घर का लक्ष्य देश की 13.7 लाख आंगनवाड़ियों के माध्यम से 7 करोड़ बच्चों और 2 करोड़ महिलाओं के जीवन में परिवर्तन लाना है।
- अगले दो वर्षों में केवल राजस्थान में ही 25,000 नंद घर स्थापित कर 20 लाख लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य है।
जमीनी स्तर पर प्रभाव
नंद घर ने पारंपरिक आंगनवाड़ियों को स्थानीय विकास के मजबूत केंद्रों में बदला है।
- नंद घर दीदी सुनीता देवी (राजस्थान): “आज हमारा नंद घर गांव का गौरव है! बच्चे यहाँ खुशी से आते हैं और माताएँ भी हम पर पहले से ज़्यादा भरोसा करती हैं। स्मार्ट टीवी, साफ-सुथरी सुविधाएं और पौष्टिक भोजन ने इसे एक सीखने और आनंद का केंद्र बना दिया है।”
- रेखा (ओडिशा): “नंद घर ने हमारे गांव की महिलाओं को देखने का नजरिया बदल दिया। मैंने नए कौशल सीखे, कमाई शुरू की और अब दूसरों को भी सिखाती हूं।”
नंद घर, राजस्थान, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और अन्य राज्यों में अपनी उपस्थिति को मजबूत करते हुए, ग्रामीण विकास का एक दोहराए जाने योग्य मॉडल बन गया है।


