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एनएसडीसी इंटरनेशनल ने जर्मनी के साथ कौशल साझेदारी को दी नई मजबूती, हैम्बर्ग में हुई उच्च स्तरीय चर्चा

नई दिल्ली/हैम्बर्ग। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) की पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडरी एनएसडीसी इंटरनेशनल ने जर्मनी में अपनी रणनीतिक यात्रा के दौरान सीमापार कौशल साझेदारियों को नई दिशा दी है। इस दौरान संस्था ने भविष्य के अनुरूप कार्यबल तैयार करने के उद्देश्य से जर्मनी के उद्योग एवं प्रशिक्षण संस्थानों के साथ व्यापक संवाद किया।

हैम्बर्ग में आयोजित प्रतिष्ठित OAV सम्मेलन में एनएसडीसी इंटरनेशनल के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जहाँ भारत, श्रीलंका, भूटान, मलेशिया और इंडोनेशिया सहित कई देशों के 100 से अधिक प्रतिनिधि एक मंच पर इकट्ठा हुए। चर्चा का केंद्रबिंदु था—वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सक्षम कार्यबल के निर्माण में अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों की भूमिका।

भविष्य-केंद्रित कौशल और अंतरराष्ट्रीय अवसर

एनएसडीसी इंटरनेशनल के सीईओ आलोक कुमार ने कहा,

“हम वैश्विक जॉब मार्केट की बदलती मांगों के अनुरूप कार्यबल तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। जर्मन उद्योगों के साथ हमारी साझेदारी इस दिशा में एक ठोस कदम है, जिससे हम भारतीय युवाओं को न केवल रोजगार के लिए तैयार कर रहे हैं, बल्कि उन्हें विश्वस्तरीय प्रदर्शन के लिए भी सक्षम बना रहे हैं।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि संस्था जर्मन भाषा, सांस्कृतिक ओरिएंटेशन और डोमेन-विशिष्ट प्रशिक्षण प्रदान कर युवाओं को वैश्विक करियर के लिए तैयार कर रही है।

राउंडटेबल चर्चाओं में प्रमुख मुद्दों पर मंथन

इस दौरे के दौरान प्रतिनिधियों ने दो अहम राउंडटेबल चर्चाओं में भाग लिया:

  1. आईमुव द्वारा आयोजित पहले सत्र में जर्मन भाषा और सांस्कृतिक प्रशिक्षण प्रदाताओं के साथ सहयोग के अवसरों पर विचार-विमर्श हुआ।
  2. दूसरे सत्र में जर्मन एम्प्लॉयर्स के साथ कौशल की खामियों, हायरिंग अपेक्षाओं और इंटीग्रेशन मॉडल्स पर चर्चा हुई।

इन चर्चाओं ने भारतीय युवाओं की वैश्विक रोजगार क्षमता बढ़ाने और देश की स्किल इकोनॉमी को मज़बूत करने की संभावनाएं उजागर कीं।

रेलवे सेक्टर में भारी संभावनाएं

प्रतिनिधिमंडल ने जर्मनी की एक अग्रणी रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर एकेडमी का भी दौरा किया। उन्होंने वहाँ की व्यवहारिक प्रशिक्षण पद्धतियों और उद्योग-सहयोग मॉडल का अध्ययन किया। उल्लेखनीय है कि नवंबर 2024 में जर्मनी के रेलवे क्षेत्र में 98,000 से अधिक रिक्तियां दर्ज की गईं, और 2030 तक पाँच मिलियन पेशेवरों की आवश्यकता का अनुमान है।

भारत को ग्लोबल टैलेंट हब बनाने की दिशा में एक कदम

एनएसडीसी इंटरनेशनल की यह यात्रा भारत को वैश्विक कौशल मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक अहम पहल मानी जा रही है। संस्था विश्वस्तरीय साझेदारियों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को सफल अंतरराष्ट्रीय करियर के लिए तैयार कर रही है।

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