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Homeराशिफलकुबेर महाराज के मंदिर में लगा भक्तों का तांता, धनधान्य की मनोकामना

कुबेर महाराज के मंदिर में लगा भक्तों का तांता, धनधान्य की मनोकामना

महज दो ही जगह है कुबेर महाराज का मंदिर

मंदसौर/हुकुम सिंह/खबर डिजिटल/ धनतेरस से दीपावली का त्यौहार शुरु हो चुका है। इस दिन लोग घरों में तो पूजा करते ही है, लेकिन कुछ मंदिर ऐसे है, जहां पर वो जाना नहीं भूलते। इन्हीं में शामिल है, मंदसौर का कुबेर महाराज का मंदिर, जहां पर धनतेरस के मौके पर भक्तों का तांता लगा रहा है, लोगों ने अपने मन की मुराद मांगी। इस मंदिर की मान्यता है कि यहां पर एक बार गुहार लगाने से आर्थिक तंगी से लोगों को मुक्ति मिल जाती है।

कहां हैं कुबेर महाराज का मंदिर ?
मध्यप्रदेश के मंदसौर में धन के देवता कुबेर महाराज केा प्राचीन मंदिर है। जोकि खिलचीपुरा में स्थित है। खास बात यह है की यहां कुबेरजी शिव परिवार के साथ एक ही मंदिर में विराजे हैं। कुबेर भगवान की अनूठी मूर्ति शिव के साथ केवल मंदसौर में ही स्थापित है। धनतेरस के अवसर पर यहां सुबह 4 बजे तंत्र पूजा की जाती है। इसके बाद हजारों भक्त दर्शन के लिए कुबेर मंदिर पहुंचते हैं, जोकि अपने मन की मुराद भगवान कुबेर से मांगते हैं।

क्या है मंदिर की महिमा
बता दें कि क्षेत्र का गुप्त कालीन प्राचीन कुबेर मंदिर शहर से 3 किमी दूर खिलचीपुरा में है। इतिहासकारों के अनुसार 1300 साल पुरानी यह मूर्ति खिलजी साम्राज्य से पहले की बताई जाती है। मंदिर पुजारी के मुताबिक गर्भगृह पर आज तक ताला नहीं लगाया है। पहले तो दरवाजा तक नहीं था। यहां कुबेर मूर्ति चतुर्भुज है। इसके एक हाथ में धन की पोटली, दो हाथों में शस्त्र व एक हाथ में प्याला है। भगवान कुबेर नेवले पर सवार हैं। दावा है कि भगवान कुबेर की इस तरह की मूर्ति देश में गुजरात के वडोदरा के बाद मध्यप्रदेश के मंदसौर में ही है। इतिहासकारों का मानना है कि मराठाकालीन युग में इस मंदिर का निर्माण हुआ है। कहते हैं यहां पूजा-आराधना करने से धन संबंधी सारी चिंताएं दूर हो जाती हैं।

भगवान महादेव के भी होते हैं दर्शन
श्री धौलागढ़ महादेव मंदिर लगभग 1300 साल पहले बना है। इसी मंदिर में स्थापित भगवान कुबेर की मूर्ति उत्तर गुप्त काल में सातवीं शताब्दी में निर्मित है। मराठा काल में धौलागिरि महादेव मंदिर के निर्माण के दौरान इसे गर्भगृह में स्थापित किया गया। मंदिर में भगवान गणेश व माता पार्वती की मूर्तियां भी हैं। कुबेर के साथ धौलागिरि महादेव व गणेशजी की मूर्ति भी विराजित हैं। भक्तों को बैठकर ही प्रवेश करना पड़ता है और वापस निकलते समय पीठ दिखाए बिना निकलना पड़ता है। जहां धन तेरस पर हवन और महाआरती का आयोजन भी किया जाता है। धन के देवता के साथ शिव पूजन के लिए गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र सहित अन्य प्रांतों से श्रद्धालु आते हैं, जोकि धनतेरस से आना शुरु हो चुके हैं।

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