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Friday, April 17, 2026
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Chaitra Navratri 2026: पंचक और खरमास के बीच कैसे करें घटस्थापना, जान लें सही मुहूर्त और पूजा करने की विधि

Chaitra Navratri 2026: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है. यह पर्व देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा के लिए समर्पित होता है और इसे नए हिंदू वर्ष की शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है. साल 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक चलेगी. इन नौ दिनों में भक्त माता दुर्गा की आराधना करते हैं और घरों में विशेष पूजा-पाठ का आयोजन किया जाता है. नवरात्रि के पहले दिन सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान घटस्थापना या कलश स्थापना का होता है. इसे देवी शक्ति के आगमन का प्रतीक माना जाता है. हालांकि इस बार नवरात्रि की शुरुआत ऐसे समय में हो रही है जब पंचक और खरमास दोनों का प्रभाव रहेगा. इसी वजह से कई श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस दौरान घटस्थापना करना शुभ रहेगा या नहीं.

कब से कब तक रहेगा पंचक और खरमास

धार्मिक पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में खरमास 15 मार्च से शुरू होकर 14 अप्रैल तक रहेगा. वहीं पंचक 16 मार्च की शाम लगभग 6:15 बजे से शुरू होकर 20 मार्च की रात करीब 2:28 बजे तक रहेगा. इसका मतलब यह हुआ कि नवरात्रि के शुरुआती दो दिन पंचक के प्रभाव में रहेंगे.ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पंचक और खरमास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश या मुंडन जैसे मांगलिक कार्य करना सामान्यतः वर्जित माना जाता है, लेकिन देवी पूजा और नवरात्रि से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान इन दोषों से प्रभावित नहीं माने जाते. इसलिए नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना करना पूरी तरह से शुभ माना जाता है.

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च 2026 को सुबह 6:52 बजे से शुरू होकर अगले दिन 20 मार्च को सुबह 4:52 बजे तक रहेगी. इसी आधार पर नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से मानी जाएगी.इस दिन घटस्थापना का प्रमुख मुहूर्त सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे तक बताया गया है. अगर किसी कारण से इस समय पूजा न हो सके, तो दोपहर के अभिजीत मुहूर्त 12:05 बजे से 12:53 बजे के बीच भी कलश स्थापना की जा सकती है.

घटस्थापना की सरल पूजा विधि

नवरात्रि के पहले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र पहनें. इसके बाद घर के पूजा स्थान को साफ करके वहां लाल कपड़ा बिछाएं और मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें.

फिर एक मिट्टी के पात्र में मिट्टी भरकर उसमें जौ बोएं, जिसे समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इसके बाद तांबे या मिट्टी के कलश में जल भरें और उसमें सुपारी, अक्षत, सिक्का और आम के पत्ते रखें. कलश के ऊपर नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर स्थापित किया जाता है.

इसके बाद दीपक जलाकर मां दुर्गा का ध्यान करें और मंत्रों का जाप करें. कई लोग दुर्गा सप्तशती का पाठ भी करते हैं और अंत में आरती के साथ पूजा संपन्न करते हैं.

क्या करें और क्या न करें

पंचक के दौरान कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है. जैसे नया निर्माण कार्य शुरू करना, दक्षिण दिशा की यात्रा करना, लकड़ी या ईंधन इकट्ठा करना और नई चारपाई बनवाना. वहीं खरमास में विवाह और अन्य मांगलिक कार्यक्रमों से परहेज किया जाता है.हालांकि नवरात्रि में देवी पूजा, व्रत, पाठ और हवन जैसे धार्मिक कार्य पूरी तरह शुभ माने जाते हैं. श्रद्धा और भक्ति के साथ की गई पूजा से जीवन में सकारात्मकता, सुख और समृद्धि आने की मान्यता है.

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