सौरभ श्रीवास्तव संवाददाता कटनी 21मार्च – शहर में अतिक्रमण हटाने और यातायात सुगम बनाने को लेकर चलाए जा रहे संयुक्त अभियान के दावों के बीच जमीनी स्थिति पर कई सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन भले ही सड़कों पर रफ्तार लौटने की बात कर रहा हो, लेकिन कई प्रमुख मार्गों और गलियों में अब भी अव्यवस्था साफ नजर आ रही है।शहरवासियों का कहना है कि कार्रवाई कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित दिखाई दे रही है, जबकि अन्य इलाकों में अतिक्रमण जस का तस बना हुआ है। मिशन चौक से स्टेशन मार्ग तक अभियान जरूर दिखा, लेकिन अंदरूनी बाजारों और रिहायशी क्षेत्रों में स्थिति में खास सुधार नहीं हुआ।चयनात्मक कार्रवाई के आरोपस्थानीय लोगों और व्यापारियों का आरोप है कि फुटकर विक्रेताओं और छोटे दुकानदारों पर तो सख्ती दिखाई जा रही है, लेकिन बड़े प्रतिष्ठानों और प्रभावशाली लोगों के अतिक्रमण पर प्रशासन की नजर नहीं पड़ रही। इससे कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।नो पार्किंग अभियान भी अधूरानो पार्किंग जोन में कार्रवाई के दावे के बावजूद कई जगहों पर वाहन अव्यवस्थित खड़े नजर आ रहे हैं। खासकर व्यस्त बाजारों में पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था न होने से लोग मजबूरी में सड़क किनारे वाहन खड़े कर रहे हैं, जिससे जाम की समस्या बनी हुई है।मुनादी और जुर्माना—स्थायी समाधान नहींमुनादी और जुर्माने की कार्रवाई को लेकर भी लोगों का कहना है कि यह सिर्फ अस्थायी उपाय है। जब तक स्थायी व्यवस्था, वैकल्पिक स्थान और स्पष्ट योजना नहीं बनेगी, तब तक अतिक्रमण फिर लौट आता है।हॉकर्स जोन भी पूरी तरह प्रभावी नहींहॉकर्स जोन की व्यवस्था होने के बावजूद कई विक्रेता वहां जाने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि वहां ग्राहक कम आते हैं, जिससे उनकी आमदनी प्रभावित होती है। ऐसे में वे फिर से मुख्य सड़कों पर लौट आते हैं।आंकड़ों बनाम वास्तविकताप्रशासन द्वारा एक सप्ताह में 92 लोगों पर जुर्माना लगाने की बात कही जा रही है, लेकिन शहर की कुल स्थिति को देखते हुए यह संख्या बेहद कम मानी जा रही है। लोगों का मानना है कि कार्रवाई व्यापक और लगातार होनी चाहिए, न कि सिर्फ दिखावे तक सीमित।जनता की मांग—समान और स्थायी व्यवस्थानागरिकों का कहना है कि अगर प्रशासन वास्तव में शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाना चाहता है, तो उसे सभी क्षेत्रों में समान रूप से कार्रवाई करनी होगी, साथ ही व्यापारियों और विक्रेताओं के लिए व्यवहारिक और स्थायी समाधान भी देना होगा।फिलहाल, अभियान के दावों और जमीनी सच्चाई के बीच का अंतर ही शहर की असली तस्वीर बयान कर रहा है
सड़कों पर ‘कार्रवाई’ का दावा, जमीनी हकीकत अब भी अधूरीअतिक्रमण हटाने की मुहिम पर सवाल
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