Singhar VS Mohan: मध्यप्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र महिला आरक्षण के मुद्दे पर हंगामेदार रहा। सदन में चर्चा के दौरान जहां विपक्ष ने आरक्षण की समय-सीमा और शर्तों पर सरकार को घेरा, वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस के इतिहास पर सवाल उठाते हुए उसे वंशवाद और अधिकारों की चोरी के लिए जिम्मेदार ठहराया।
उमंग सिंघार के सवाल
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने चर्चा की शुरुआत करते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब बात आधी आबादी की है, तो 33 फीसदी तक सीमित क्यों? महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण मिलना चाहिए। आरक्षण के लिए 2029 का इंतजार क्यों? इसे आज से ही लागू क्यों नहीं किया जा रहा? परिसीमन और जनगणना की शर्तें महज बहाना हैं। सरकार ऑनलाइन सर्वे करा ले, प्रदेश की महिलाएं आज ही आरक्षण चाहती हैं। मुख्यमंत्री अपने मंत्रिमंडल में अभी 33 फीसदी महिलाओं को जगह देकर मिसाल पेश क्यों नहीं करते? उन्होंने कहा कि अगर सरकार गंभीर है, तो संसद का विशेष सत्र बुलाए, पूरा विपक्ष समर्थन करेगा।
मुख्यमंत्री का पलटवार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नेता प्रतिपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कांग्रेस की नीतियों पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस 80 सालों से बहनों के साथ भेदभाव कर रही है। 1928 से अब तक कांग्रेस सिर्फ बातें करती रही, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं किया। बिना संविधान संशोधन और परिसीमन के इसे लागू करना तकनीकी रूप से संभव नहीं है। विपक्ष साथ आए और संशोधन में सहयोग करे। सीएम ने कहा कि महिलाओं का वर्चस्व बढ़ेगा तो राजनीति में वंशवाद की नींव हिल जाएगी, इसीलिए कांग्रेस ‘बांटो और राज करो’ की नीति पर चल रही है। उन्होंने बताया कि परिसीमन के बाद लोकसभा में सीटें बढ़कर 850 और विधानसभा में 230 से बढ़कर 350 तक हो जाएंगी, जो महिलाओं को प्रतिनिधित्व देंगी।
संस्कृति बनाम चोरी
मुख्यमंत्री ने जहां भारतीय संस्कृति में देवी पूजन का हवाला देकर सरकार के महिला प्रेम को दर्शाया, वहीं विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार महिलाओं के नाम पर केवल राजनीतिक सीढ़ी बनाना चाहती है। सिंघार ने खिलाड़ियों और बुजुर्ग महिलाओं को न्याय न मिलने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया।
