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Friday, April 17, 2026
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भोपाल में खामेनेई की मौत के बाद पसरा मातम… अमेरिका-इजराइल के खिलाफ लगे नारे

खामेनेई को बताया मजलूमों का रहबर

Israel-Iran War: भोपाल/परवेज खान/खबर डिजिटल/ खाड़ी के देशों में इजरायल और ईरान का युद्ध चरम पर है, इसी बीच 1 मार्च रविवार को जैसे ही ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर फैली मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कई जगहों पर मातम छा गया। खबर मिलते ही शिया समुदाय में शौक की लहर दौड़ गई। करौंद स्थित शिया मस्जिद में जोहर की नमाज के बाद श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान जमकर अमेरिका-इजराइल मुर्दाबाद के नारे लगाए गए। इमामों ने खामेनेई को जुल्म के खिलाफ लड़ने वाला निडर नेता और मजलूमों का रहबर करार दिया।

खामनेई की जमकर तारीफ
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद भोपाल के करोंद स्थित शिया मस्जिद में रविवार को जोहर की नमाज के बाद श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई, इस मौके पर सभा को संबोधित करते हुए इमाम बाकर हुसैन ने कहा, ‘पूरी दुनिया उस शख्सियत को जानती है, जिसने जुल्म के खिलाफ आवाज उठाई और मजलूमों का साथ दिया, खामेनेई ने अपने जीवन में अत्याचार का विरोध किया और इस्लामी इंकलाब के सिद्धांतों को आगे बढ़ाया।’ सभा के दौरान इस्लामी नारों से वातावरण गूंज उठा।

इमाम हुसैन की मौत का किया जिक्र
अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद आयोजित सभा में इमाम हुसैन की मौत का जिक्र करते हुए कहा गया कि ‘इतिहास गवाह है कि किसी विचारधारा या आंदोलन को किसी एक व्यक्ति के जाने से समाप्त नहीं किया जा सकता, इंकलाब की राह आगे भी जारी रहेगी और उसे आगे बढ़ाने वाले लोग मौजूद रहेंगे।’ वही सभा के आखिर में इमाम हुसैन ने ताजियत पेश की। सभा में मौजूद लोगों ने इजराइल मुर्दाबाद, अमेरिका मुर्दाबाद, खामेनेई जिंदाबाद के नारे लगाए।

खामनेई को बताया जालिमों के खिलाफ
शोकसभा के दौरान मस्जिद मोहम्मदी के इमाम जुमा सैयद अजहर हुसैन रिजवी ने भी सभा को संबोधित किया, उन्होंने अयातुल्ला अली खामेनेई को उम्मत-ए-मुसलमान का निडर रहबर बताते हुए कहा कि, ‘वे हमेशा जालिम के खिलाफ और मजलूम के समर्थन में खड़े रहे, खामेनेई ने कभी किसी आधार पर भेदभाव नहीं किया, बल्कि जहां भी अत्याचार हुआ, उसके खिलाफ आवाज उठाई, मजलूम का साथ देना इंसानियत की पहचान है। शिया समुदाय ने कहा कि, उम्मत-ए-मुसलमान खुद को यतीम महसूस कर रही है. शहादत किसी भी विचारधारा को कमजोर नहीं करती, बल्कि उसे और मजबूत बनाती है।

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