Meenakshi Natarajan: मध्य प्रदेश की सियासत से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज और कांग्रेस को नेस्तनाबूत कर देने वाली बड़ी खबर सामने आई है। राजधानी भोपाल के विधानसभा सचिवालय में मंगलवार, 9 जून 2026 को देर शाम तक चली हाई-वोल्टेज स्क्रूटनी के बाद कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र आधिकारिक रूप से निरस्त कर दिया गया है।
इस ऐतिहासिक वैधानिक फैसले के साथ ही मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट का मुकाबला वोटिंग से पहले ही खत्म हो गया है और अब भारतीय जनता पार्टी के तीसरे प्रत्याशी महेश केवट का निर्विरोध निर्वाचित होना पूरी तरह तय हो चुका है। निर्वाचन आयोग द्वारा इसकी औपचारिक घोषणा 11 जून की शाम को की जाएगी। इस बड़े झटके के बाद बेंगलुरु भेजे जा रहे कांग्रेस विधायकों की बाड़ेबंदी का कोई औचित्य नहीं रह गया है और कांग्रेस खेमे में सन्नाटा पसर गया है। बताया जा रहा है कि बेंगलुरु जा रहे विधायक भोपाल वापस लौट रहे है।
तथ्य छुपाने का आरोप
बीजेपी मंत्रियों और विधिक सलाहकारों ने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने पुख्ता सबूत पेश करते हुए आपत्ति जताई थी कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने चुनावी हलफनामे में तेलंगाना राज्य में चल रहे एक कानूनी मामले की जानकारी को जानबूझकर छुपाया। दरअसल, हैदराबाद की चौथी अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत में वहां की पूर्व कॉर्पोरेटर ए. श्रीलता द्वारा एक याचिका दायर की गई है। इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि मीनाक्षी नटराजन ने कुंभम शिव कुमार रेड्डी नामक एक व्यक्ति को राजनैतिक संरक्षण दिया है। इस रेड्डी नाम के व्यक्ति पर पूर्व कॉर्पोरेटर श्रीलता ने छेड़छाड़, बदसलूकी और जान से मारने की धमकी देने के बेहद संगीन आरोप लगाए हैं।
लगी थीं धाराएं
इस पूरे विवादित मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 356, 61, 45, 46 और 79 के तहत संगीन आपराधिक कड़ियां जुड़ी हुई हैं। बीजेपी ने दलील दी कि इतने गंभीर मामले की जानकारी हलफनामे में न देना सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है, जिसे पीठासीन अधिकारी ने सही पाया।
कांग्रेसी ने किया कांड!
बताया जा रहा है कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का मामले को लेकर कहना है कि हमे तेलंगाना से ही एक कांग्रेसी नेता ने इस मामले की पूरी जानकारी दी थी।
