छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों संगठन विस्तार और जनाधार मजबूत करने की होड़ तेज हो गई है. भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही अपने-अपने स्तर पर कार्यकर्ताओं और आम लोगों को जोड़ने में जुटी हुई हैं. इसी बीच बस्तर क्षेत्र से एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है जिसने स्थानीय राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है. दंतेवाड़ा जिले में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने बीजेपी छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है.
दंतेवाड़ा के फूलपाड़ गांव में हुआ सामूहिक दल-बदल
मिली जानकारी के अनुसार दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा विकासखंड की ग्राम पंचायत फूलपाड़ में 450 से अधिक ग्रामीणों ने एक साथ कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की. ग्रामीणों का यह फैसला क्षेत्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है. बताया जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की गति और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली को लेकर लोगों में असंतोष था. इसी नाराजगी के चलते बड़ी संख्या में लोगों ने भाजपा से दूरी बनाने का निर्णय लिया.
कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी में हुआ स्वागत
ग्रामीणों के कांग्रेस में शामिल होने के दौरान पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे. कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संयुक्त महामंत्री छविंद्र कर्मा, पीसीसी सदस्य और पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष अवधेश गौतम, आदिवासी कांग्रेस के जिला अध्यक्ष शंकर कुंजाम तथा ब्लॉक अध्यक्ष देव सिंह ताती ने भाग लिया. इस अवसर पर कांग्रेस नेताओं ने नए सदस्यों का पार्टी का गमछा पहनाकर स्वागत किया. नेताओं ने उपस्थित ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि कांग्रेस हमेशा जनता के मुद्दों के साथ खड़ी रही है और आगे भी उनकी आवाज उठाती रहेगी. कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी किसानों, मजदूरों, आदिवासी समुदाय और आम नागरिकों के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करती रही है. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस की नीतियां समाज के कमजोर वर्गों को मजबूत बनाने पर केंद्रित हैं और पार्टी आगे भी इसी दिशा में काम करती रहेगी.
स्थानीय राजनीति पर पड़ सकता है असर
एक साथ 450 से अधिक ग्रामीणों का कांग्रेस में शामिल होना राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है. इस घटनाक्रम ने बस्तर क्षेत्र की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसका असर आने वाले समय में स्थानीय संगठनात्मक गतिविधियों और राजनीतिक रणनीतियों पर देखने को मिल सकता है. फिलहाल इस सामूहिक दल-बदल ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि बस्तर की राजनीति में आगामी दिनों में कई नए समीकरण बन सकते हैं और दोनों प्रमुख दलों के बीच राजनीतिक मुकाबला और दिलचस्प होने वाला है.
