छिदवाड़ा/तौफीक मिस्कीनी/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में जहरीले कोल्ड्रिफ कफ सिरप ने 24 बच्चों की जान गई है हर कोई इस घटना से दुखी है और सहमा हुआ है, लेकिन 5 वर्षीय कुणाल जिंदगी की जंग जीतकर अस्पताल से वापस अपने घर लौट आया है, करीब 115 दिन तक नागपुर के अस्पताल में उपचार चलता रहा, लेकिन अब मौत को मात देकर वापस तो लौट गया है लेकिन दोनों आंखों की रोशनी चली गई है, जिसके कारण दोनो आंखों से देख नही पा रहा हैं, और अब अपने पैरों के बल से नहीं चल पा रहा है। कुणाल कक्षा केजी वन पढ़ रहा था और बाकायदा घर में पढ़ाई के लिए दीवारों में पहाड़ों का चार्ट लगाया था, ताकि बेटा अच्छी पढ़ाई कर सके और बड़ा होकर मामा की तरह फौजी बनकर देश की सेवा कर सके, लेकिन अब कुणाल के परिजन भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कि आंखों की रोशनी जल्द से जल्द लौट आए और वह फिर पहले जैसे खेलने कूदने लगे और पढ़ाई कर सके, वहीं परिवार के लोगों को सरकार और प्रशासन से उम्मीद है कि कुणाल की मदद करेंगे और आंखों की रोशनी कुणाल की वापस आएगी।
‘मामा की तरह फौजी बनूंगा पापा’
पापा से बोलना था कुणाल की बड़ा होकर मामा की तरह फौजी बनना है, ये सपना लिए खेल कूद में व्यस्त रहने वाला मासूम कुणाल अब बिस्तर में अपने अच्छे होने का इंतजार कर रहा हैं। कुणाल की ये हालत कोल्ड्रिफ कफ सिरप से हुई हैं, परासिया क्षेत्र में रहने वाले डॉक्टर प्रवीण सोनी को बुखार आने पर दिखाया गया था उसके बाद डॉक्टर ने कोल्ड्रिफ कफ सिरप लिखा था, जिसको पीने के बाद लगातार कुणाल की तबीयत बिगड़ती रही और फिर छिंदवाड़ा से उन्हें नागपुर अस्पताल रेफर कर दिया गया। जहां इलाज के बाद वह अब घर आया है, परिवार ने बताया कि उन्हें वो मंजर याद है कि जब एक-एक कर सात बच्चों ने दम तोड़ा था।
कुणाल के पिता टिंकू बोले जेवर और भैंस बेचकर बेटे का इलाज
कुणाल के पिता टिंकू ने बताया कि परासिया से लेकर नागपुर तक अस्पताल में इलाज में 10 लाख रुपए से ज्यादा का खर्च आया है, रिश्तेदारों से और दोस्त लोगों से कर्ज लिया है, और घर में रखे जेवर और दो मवेशी बेचकर बेटे का उपचार कराया है। सरकार से 4 लाख रुपये की राशि मिले थे, लेकिन इलाज में उससे कई ज्यादा का खर्च आ गया। जिसके लिए उन्होंने सरकार और प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।
मां बोली – पैसे की व्यवस्था हो जाये तो चेन्नई ले जाएंगे
कुणाल की मां के आंखों में आंसू और चिंता की लकीर नजर आ रही है, बस उसे इंतजार है सरकार और संस्थाएं मदद के लिए आगे आ जाएं और बेटे का उपचार चेन्नई के अस्पताल में शुरू हो जाए जिससे कि आंखों की रोशनी वापस आ जाए तो पिता की नौकरी और कहीं लग जाए जिससे कि घर परिवार पहले जैसा चल सके। जब से बेटे की तबीयत बिगड़ी है तब से पिता भी नौकरी छोड़कर साथ है और मां सामने से हटती नहीं। इसीलिये उन्होंने खबर डिजिटल से माध्यम से भी मदद की गुहार लगाई है।


